अमित कुईया
सीहोर। पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली के कारण बंद पड़ी बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज कर्ज के चलते कभी भी नीलाम हो सकती है। प्रशासन के अधिकारियों ने फैक्ट्री पर बकाया विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपए की राशि की रिकवरी के लिए कड़ा कदम उठाया है और बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज को कर्ज चुकाने के लिए एक नोटिस भेजा गया है साथ ही फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एक नोटिस चस्पा किया गया है।
गौरतलब है कि बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए बंद हो गई थी। लेकिन जिस वक्त फैक्ट्री का संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को आधा दर्जन से अधिक विभिन्न विभागों को विभिन्न मदों में राशि अदा करना थी जो कि फैक्ट्री प्रबंधन फैक्ट्री बंद होने के सालों बाद भी नहीं चुका पाया है।
प्रशासन ने उठाया कदम
पिछले दिनों सीहोर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री की चार हजार एकड़ से अधिक भूमि को सीलिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित कर लिया था जिसके बाद प्रशासन ने एक ओर कदम उठाते हुए अब फैक्ट्री में विभिन्न विभागों की बकाया राशि की वसूली के लिए फैक्ट्री प्रबंधन पर पिछले सोलह मार्च को एक नोटिस (मांग पत्र) भेजा है साथ ही बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज के मुख्य द्वार पर प्रशासन ने बकाया राशि की वसूली के लिए एक नोटिस भी चस्पा किया है जिसमें नियत समय में कंपनी की देनदारी चुकाने के निर्देश उल्लेखित है।
दर्जनों विभागों का बकाया
जिस वक्त बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज का सुचारु संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को अपनी जरुरतों के लिए विभिन्न विभागों से मदद की जरुरत पड़ती थी। जिसमें सूत्रों के मुताबिक गन्ना उत्पादन में सिंचाई के लिए पानी की जरुरत पड़ती थी जिसका करीब साढ़े सात लाख रुपए आज भी सिंचाई विभाग को कंपनी द्वारा दिया जाना है। इसी तरह विद्युत वितरण कंपनी का भी करीब 25 से 30 लाख रुपए बकाया है। इसी तरह नगर पालिका का समेकित कर, संपत्ति कर और जल कर का करीब एक करोड़ रुपए बकाया है। कंपनी को मंडी कमेटी और गन्ना विभाग का भी करीब 14 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया भुगतान करना है। यह सभी भुगतान वर्ष 1994 से 95 के समय के जब कंपनी का सुचारु संचालन होता था।
मजदूरों का बकाया 20 करोड़
बीएसआई शुगर इण्स्ट्रीज पर ताले लगने के बाद यहां कार्यरत हजारों मजदूरों का करीब बीस करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान प्रबंधन की लापरवाही के कारण नहीं हो सका है। इस बकाया भुगतान को लेकर मजदूर संगठन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन वर्ष 95-96 में मील प्रबंधन इस याचिका पर स्टे ले आया, लेकिन पंद्रह साल बाद एक बार फिर इस स्टे पर बेकेट मिल गया है जिसके बाद यह तय हो गया है कि मिल प्रबंधन को कंपनी में कार्यरत उन हजारों मजदूरों को पैसा किसी भी सूरत में देना होगा।
कंपनी होगी नीलाम
विश्वत प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि विगत सोलह मार्च को कंपनी पर विभिन्न विभागों और अन्य मदों की बकाया राशि की वसूली के लिए एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद यदि मिल प्रबंधन बकाया राशि देने में न नूकूर करता है तो यह संभवत: यह तय है कि निकट समय में कंपनी के अधिकार क्षेत्र में सीलिंग मुक्त भूमि और शुगर फैक्ट्री की कुर्की कर नीलामी की राशि से यह बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
पहले भी चस्पा हुआ था नोटिस
बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन स्तर पर सन् 1995 में भी कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था लेकिन उस वक्त मिल प्रबंधन नोटिस के विरुद्ध स्टे ले आया जिसके ठीक पंद्रह साल बाद प्रशासन पुन: इस मामले में आगे बढ़ा है और अब कंपनी को एक बार फिर नोटिस जारी करते हुए बकाया भुगतान राशि देने के लिए चेताया गया है।
इनका कहना है
विभिन्न विभागों की सालों से लंबित बकाया राशि के भुगतान के लिए मिल प्रबंधन को एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है।
अल्का एक्का, तहसीलदार सीहोर
सीहोर। पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली के कारण बंद पड़ी बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज कर्ज के चलते कभी भी नीलाम हो सकती है। प्रशासन के अधिकारियों ने फैक्ट्री पर बकाया विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपए की राशि की रिकवरी के लिए कड़ा कदम उठाया है और बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज को कर्ज चुकाने के लिए एक नोटिस भेजा गया है साथ ही फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एक नोटिस चस्पा किया गया है।
गौरतलब है कि बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए बंद हो गई थी। लेकिन जिस वक्त फैक्ट्री का संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को आधा दर्जन से अधिक विभिन्न विभागों को विभिन्न मदों में राशि अदा करना थी जो कि फैक्ट्री प्रबंधन फैक्ट्री बंद होने के सालों बाद भी नहीं चुका पाया है।
प्रशासन ने उठाया कदम
पिछले दिनों सीहोर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री की चार हजार एकड़ से अधिक भूमि को सीलिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित कर लिया था जिसके बाद प्रशासन ने एक ओर कदम उठाते हुए अब फैक्ट्री में विभिन्न विभागों की बकाया राशि की वसूली के लिए फैक्ट्री प्रबंधन पर पिछले सोलह मार्च को एक नोटिस (मांग पत्र) भेजा है साथ ही बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज के मुख्य द्वार पर प्रशासन ने बकाया राशि की वसूली के लिए एक नोटिस भी चस्पा किया है जिसमें नियत समय में कंपनी की देनदारी चुकाने के निर्देश उल्लेखित है।
दर्जनों विभागों का बकाया
जिस वक्त बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज का सुचारु संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को अपनी जरुरतों के लिए विभिन्न विभागों से मदद की जरुरत पड़ती थी। जिसमें सूत्रों के मुताबिक गन्ना उत्पादन में सिंचाई के लिए पानी की जरुरत पड़ती थी जिसका करीब साढ़े सात लाख रुपए आज भी सिंचाई विभाग को कंपनी द्वारा दिया जाना है। इसी तरह विद्युत वितरण कंपनी का भी करीब 25 से 30 लाख रुपए बकाया है। इसी तरह नगर पालिका का समेकित कर, संपत्ति कर और जल कर का करीब एक करोड़ रुपए बकाया है। कंपनी को मंडी कमेटी और गन्ना विभाग का भी करीब 14 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया भुगतान करना है। यह सभी भुगतान वर्ष 1994 से 95 के समय के जब कंपनी का सुचारु संचालन होता था।
मजदूरों का बकाया 20 करोड़
बीएसआई शुगर इण्स्ट्रीज पर ताले लगने के बाद यहां कार्यरत हजारों मजदूरों का करीब बीस करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान प्रबंधन की लापरवाही के कारण नहीं हो सका है। इस बकाया भुगतान को लेकर मजदूर संगठन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन वर्ष 95-96 में मील प्रबंधन इस याचिका पर स्टे ले आया, लेकिन पंद्रह साल बाद एक बार फिर इस स्टे पर बेकेट मिल गया है जिसके बाद यह तय हो गया है कि मिल प्रबंधन को कंपनी में कार्यरत उन हजारों मजदूरों को पैसा किसी भी सूरत में देना होगा।
कंपनी होगी नीलाम
विश्वत प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि विगत सोलह मार्च को कंपनी पर विभिन्न विभागों और अन्य मदों की बकाया राशि की वसूली के लिए एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद यदि मिल प्रबंधन बकाया राशि देने में न नूकूर करता है तो यह संभवत: यह तय है कि निकट समय में कंपनी के अधिकार क्षेत्र में सीलिंग मुक्त भूमि और शुगर फैक्ट्री की कुर्की कर नीलामी की राशि से यह बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
पहले भी चस्पा हुआ था नोटिस
बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन स्तर पर सन् 1995 में भी कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था लेकिन उस वक्त मिल प्रबंधन नोटिस के विरुद्ध स्टे ले आया जिसके ठीक पंद्रह साल बाद प्रशासन पुन: इस मामले में आगे बढ़ा है और अब कंपनी को एक बार फिर नोटिस जारी करते हुए बकाया भुगतान राशि देने के लिए चेताया गया है।
इनका कहना है
विभिन्न विभागों की सालों से लंबित बकाया राशि के भुगतान के लिए मिल प्रबंधन को एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है।
अल्का एक्का, तहसीलदार सीहोर
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