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शनिवार, 8 सितंबर 2012


सीहोर के विकास पर क्यों हंस रहे हो मुन्ना !

 - सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर लोगों की राय खोल रही विकास की पोल
सीहोर। सीहोर जिला मुख्यालय पर दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस और भाजपा ने पिछले कई सालों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए हैं किसी ने कहा हमने शहर को रोजगार मुहैया कराया है तो किसी ने शहर को सुंदर और विकसित बनाने की बात कही है, लेकिन हकीकत उस मुन्ने की हंसी खोल रही है जिसको किसी ने कह दिया है कि सीहोर में विकास के मसीहा रहते हैं।
इन दिनों एक आम आदमी द्वारा सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट किया है जिसमें एक नन्हा सा बालक हंस रहा है उसके हंसी के पीछे की वजह भी इस फोटो के नीचे बताई गई है जिसमें यह लिखा गया है कि इसे
 किसी ने बता दिया कि शहर में विकास के मसीहा रहते है इस फोटो के ठीक बगल में कीचड़ से सनी एक सड़क और
 उसे पार करता एक व्यक्ति शहर की विकास की गाथा खुद ब खुद बया करने के लिए काफी है। हालांकि फोटो में क्या गलत कहा गया है।
गौरतलब है कि शहर में विकास को लेकर सड़कें तो बनाई गई लेकिन स्थिति आज सबके सामने है। तीन-तीन माह पहले बनी सड़कें उधडऩे के बाद उनके साथ हुए अन्याय और गिट्टी और चुरी में हुए भ्रष्टाचार की गाथा खुद बयां कर रही है। चाहे प्रदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र गणेश मंदिर मार्ग हो चाहे शहर की प्रमुख व्यापारिक केन्द्रों पर चलने वाले मार्ग हो, गली मोहल्लों के मार्ग हो, झुग्गी बस्तियों तक पहुंचने वाले रास्ते हो सभी उधड़ चुके हैं।  इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
दोनों राजनैतिक दलों पर उठती है उंगलियां
शहर के विकास को लेकर शहर की जनता ने शहर के विकास को लेकर कांग्रेस को कई सालों तक मौका दिया तो अब भाजपा पर भी विश्वास जताया, लेकिन जब विकास की बात आई तो दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों के नेताओं ने विकास के दावे तो किए लेकिन वादे आज भी जमीनी नहीं हो पाए और अब यदि मुन्ना इन मसीहाओं पर हंसता है तो क्या बुरा करता है।

शनिवार, 28 जुलाई 2012


आष्टा का बस स्टैंड पाच फिट पानी में डुबा हुआ 
अमित कुईया
पानी में डूबा आष्टा बस स्टैंड ,इछावर के कई गाँव जल मग्न
सीहोर। जिले में चौबीस घंटे के दौरान जारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात निर्मित हो गए हैं। समीपस्थ तहसील आष्टा में कल देर रात से अब तक जारी बारिश के कारण हालात यह हो गए कि बस स्टैंड क्षेत्र में सड़क से पांच  फीट की ऊंचाई तक पानी में डुवा  हुआ है। जिससे दुकानों में रखा सामान जलमग्र हो गया है तो वहीं लोग इस छोर से उस छोर तक आ जा नहीं पा रहे हैं। इधर जिले के इछावर तहसील के ग्राम रामनगर में तेज बारिश के कारण बाढ़ के हालात निर्मित हो गए हैं। प्रशासन ने यहां पर किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की हैं और क्षेत्र के करीब पचास मकानों को खाली कराया है जिससे की जान माल की हानि को रोका जा सका। वहीं इसी क्षेत्र के ग्राम हालियाखेड़ी, जाटखेड़ी, मूलाखेड़ी, झालकी, गोलूखेड़ी में भी स्थिति बढ़ी चिंताजनक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने के कारण ग्रामीणों के घर में रखा अनाज भींग गया है और इनके सामने भूखे मरने की स्थिति निर्मित हो गई है।  इधर जिले की रेहटी तहसील में भी तेज बारिश के बाद कुछ इसी तरह के हालात बने हुए हैं यहां पर भी कुछ एक मकानों में रहने वाले लोगों को विस्थापित किया गया है।

शनिवार, 14 जुलाई 2012

क़स्बे में पागल कुतते का आतंक ,कइयो को किया घायल
        शहर के क़स्बा क्षेत्र में पागल कुत्ते ने शनिवार की रात आंतंक मचा दिया और करीब दो दर्जन से ज्यादा लोगो को घायल कर दिया ! जानकारी के आनुसार क़स्बा क्षेत्र में शनिवार की शाम एक पागल कुत्ते ने अलग अलग  जगह लोगो को काटना शुरू कर दिया और देर रात तक करीब 27 लोगो को अपना शिकार बनाया ! सभी घायलों को उपचार के लिया जिला अस्पताल लाया गया  ! इन सभी घायलों का इलाज समाचार लिखे जाने तक अस्पताल में चल रहा  है !
 
अमित कुईया 
कालसर्प और नागपंचमी का योग बहुत ही दुर्लभ होता है और बहुत खास भी। वैसे तो ये योग कभी-कभी कुछ सालों में बन जाता है। जैसे 2008 में बना था लेकिन नीच राशि में स्थित राहु-केतु के साथ बनने वाला कालसर्प योग व नाग पंचमी का संयोग 93 साल बाद बन रहा है ये विशेष दुर्लभ योग बड़ा असर देने वाला रहेगा। इससे पहले नीच राशि का ये कालसर्प योग 10 जुलाई 1919 को बना था लेकिन तब भी ये योग शनिवार को नहीं बना।

ये घटना बहुत ही दुर्लभ है। पिछले 100 से अधिक सालों में ऐसा देखने में नहीं आया कि शनिवार को शुरू होने वाले कालसर्प योग जिसमें राहु-केतु अपनी नीच राशि में रहेंगे और इसी कालसर्प में नागपंचमी का पर्व आ रहा है।

राहु और केतु के कारण कालसर्प योग बनता है। राहु और केतु शनि के दोनों हाथ हैं। शनि किसी को कर्मो का फल देता है तो राहु और केतु के द्वारा ही देता है। शनिवार को ही राहु और केतु के कालसर्प योग बनने और इस कालसर्प योग में नागपंचमी का पर्व आने के कारण ये घटना बहुत बड़ी और असरदार रहेगी।

बुधवार, 11 जुलाई 2012


भोपाल में सिहोर जिले के नवागत डी .एम को मिला  आईटी अवार्ड


सीहोर जिले के नवागत डी .एम .कविंद्रे कियावत को खंडवा जिले में  स्वान के माध्यम से किए गए आईटी क्षेत्र में हुए कामों का लेकर  सोमवार को भोपाल में सम्मानित किया गया । भोपाल में होने वाले इस कार्यक्रम को स्वान के माध्यम से  पुरे प्रदेश भर में  दिखाया गया  । इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने  अवार्ड दिया !गौर तलब  है की जिले के नवागत डी .ऍम कविन्द्र कियावत को खंडवा  जिले में आईटी के क्षेत्र में किये गए किए गए कामों को लेकर  प्रदेश स्तर पर सराहना मिली है। इसमें ई किसान खेत पाठशाला, ई समीक्षा, ई जनसुनवाई के काम हैं। आई .टी .क्षेत्र में उनकी गहरी रूचि के बाद यह माना  जा रहा है की वह सीहोर जिले में भी वह  आई .टी .क्षेत्र में रूचि दिखाते हुए कही उलेलेखनि य कार्यो को   अंजाम देंगे !

मंगलवार, 10 जुलाई 2012

 पंकज पुरोहित नागरिक बैंक के संचालक बने
सीहोर । सीहोर नागरिक सहकारी बैंक में रिक्त हुए संचालकों के दो पदों पर सहयोजन द्वारा निर्वाचन की प्रक्रिया के द्वारा संचालकों का चुनाव निर्विरोध रूप से किया गया, समाजसेवी तथा रंगकर्मी मास्टर टीकाराम राठौर एवं साहित्यकार और जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष पंकज पुरोहित को बैंक का संचालक चुना गया ।

रविवार, 8 अप्रैल 2012

534 गांव, 72 में दिखा जलसंकट

अमित कुईया
सीहोर। तहसील के साथ ही संपूर्ण जिले में मार्च के अंतिम सप्ताह में जलसंकट ने गंभीर रूप इतियार कर लिया है। सीहोर नगर के आसपास के गांवों मेंं ही पानी का टोटा हो गया है, दूरस्थ गांवों की हालत ओर अधिक खराब है, इधर जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को यह जलसंकट या तो नजर नहीं आ रहा है या फिर वह अपने आंकड़ो में इस जलसंकट को छिपाने का प्रयास कर रहा है।
विभाग द्वारा जलसंकट को लेकर तैयार कार्ययोजना तो कम से कम इसी ओर इशारा कर रही है। विभाग को सीहोर तहसील के केवल बीस गांवों व जिले के हजार में से 70 गांवों में ही जलसंकट दिखाई दिया। विभाग ने 534 गांवों के लिए तीन करोड़ की योजना बनाई है, लेकिन यह योजना जब तक अमलीजामा पहनेगी जलसंकट भयावह रूप ले चुका होगा।
534 गांवो में जलसंकट, 72 में परिवहन
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सूत्रों की माने तो विभाग द्वारा जो प्रारभिंक सर्वे के बाद जलसंकट की कार्ययोजना बनाई है, उसमें जिले में 534 गांवों में जलसंकट की स्थिति पाई गई है। इस जलसंकट से निपटने के लिए तीन करोड़ की भारीभरकम राशि का प्रावधान भी किया गया है, लेकिन यह राशि कहां और कैसे खर्च होगी नहीं बताया गया, कार्ययोजना पर काम भी एक अप्रैल के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इधर कार्ययोजना मेें जिले के मात्र 72 गांवों में ही पेयजल परिवहन की स्थिति पाई गई है। जिनके लिए बीस लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। बताया जा रहा है कि यह सर्वे फरवरी माह में किया गया था, जिसके आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई, लेकिन एक महीने बाद ही जिलेभर में जलसंकट की स्थिति दोगुनी तक हो गई।
12 सौ से अधिक हैण्डपंप सूखे
जिले की पांचो तहसीलों में पीएचई विभाग द्वारा किए गए सर्वे में चौकाने वाली बातें सामने आई है। विभाग की ही माने तो जिले के 1220 से अधिक हैण्डपंप जलस्तर नीचे पहुंच जाने के कारण सूख चुके है। विभाग अब इनमें पाइप बढ़ाने की बातें कर रहा है, लेकिन यह पाइप कब बढ़ाए जाएगें विभाग नहीं बता पा रहा है।
पचामा, शिवपुरी, सेवनियां में जलसंकट
जिला मुख्यालय की पांच से दस किलोमीटर की सीमा में स्थित कई गांवों में जलसंकट मार्च के अंतिम सप्ताह में गंभीर रूप धारण कर चुका है। गांवों के हैण्डपंप और कुए सूखे चुके है, ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को दो-दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। मुयालय के नजदीक स्थित ग्राम पचामा हो या काहिरी मार्ग पर पडऩे वाला शिवपुरी या सीवन नदी के किनारे बसा गांव सेवनिया, तीनों ही गांवों में पानी की स्थिति गंाीर हो गई है। पचामावासी एक किलोमीटर दूर राजपूत कृषि फार्म से पानी ले जा रहे है तो शिवपुरी वासी दो किलोमीटर दूर से, सेवनियां में नदी के अंदर लगे हैण्डपंप सूख चुके है।

सौ फिट गहराया भूल स्तर

भूजल सर्वेक्षण विभाग के आंकड़ों को माने तो पिछले दो महीने में ही जलसंकट तीन गुना तक बढ़ गया है। जनवरी में भूजल का आंकड़ा जहां 10 से 12 मीटर तक नीचे आंका गया था तो मार्च के तीसरे सप्ताह में किए गए आंकड़े तीन गुना तक ज्यादा नीचे पहुंच गए थे। बीस मार्च तक लिए गए आंकडो में जिले में भूजल स्तर 30 से 32 मीटर तक नीचे उतर गया था। आंकड़े जिले में दिनों दिन गहराते जलसंकट की ओर इशारा कर रहे है। मार्च में सौ फिट तक भूजल का नीचे जाना खतरे की घंटी बजा रहा है।

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ग्रामीणों की नींद को राहत दिलाने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष

अमित कुईया
सीहोर। रात भर रेत निकालती पोखलीन मशीनों की गडग़ड़ आवाजें, रेत का परिवहन करते ट्रक ग्राम जनमासा और बनेठा के ग्रामीणों के लिए पिछले लंबे समय से परेशानी का सबब बने हुए हैं। इन परेशानियों से दो-चार हो रहे ग्रामीणों ने आखिरकार अपनी गुहार प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से लगाई और इन ग्रामीणों की गुहार के बाद मंगलवार को नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री के ग्राम जैत और ग्राम जनमासा एवं बनेठा पहुंचे। जहां उन्होंने हो रहे रेत खनिज संपदाओं के खनन और परिवहन की वीडियोग्राफी करवाई। अब देखना यह है कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के क्षेत्र में दी गई अचानक दस्तक से राजनीति कितनी उफान मारती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में पिछले कुछ माह से खनिज के उत्खनन को लेकर पूरे प्रदेश भर में राजनीति गरमाई हुई है। लेकिन इस गरमाई राजनीति के बीच एक रोचक तथ्य यह भी है कि जिले के दुरस्थ और मुख्यमंत्री के ग्राम जैत के आसपास रेत और अन्य खनिज संपदाओं का भंडार हैं। जिसके चलते यहां पर दिन और रात इसका खनन का कार्य सुचारु चलता है। ग्राम जैत से सटे ग्राम जनमासा और बनेठा के ग्रामीण यहां हो रहे दिन और रात रेत के परिवहन और खनन में उपयोग आने वाले संसाधनों की आवाज से रात भर चैन की नींद नहीं सो पाते हैं। इन सब परेशानियों के बीच पिछले दिनों ग्राम बनेठा और जनमासा के ग्रामीणों ने अपनी शिकायत भोपाल पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को सुनाई। जिसके बाद बीते मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस कांग्रेसी विधायकों के साथ औचक तरीके से ग्राम जैत, बनेठा, जनमासा सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। हालांकि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इन ग्रामों में आने से पहले इस बात का ख्याल जरुर रखा होगा कि ग्रामीणों की परेशानी अपनी जगह है लेकिन शायद उनके मन में यह बात भी आ रही होगी कि ग्रामीणों की शिकायत के मद्देनजर उनके हाथ कुछ ऐसे अहम तथ्य हाथ लग जाए जिससे  कि वे चर्चाओं में चल रहे अवैध उत्खनन के मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमी पैदा कर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकें। यह चर्चा नेताप्रतिपक्ष के अचानक हुए दौरे के बाद राजनैतिक गलियारों में चलती रही।
हुई वीडियोग्राफी
मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस साथी विधायकों के साथ जैसे ही अचानक दोपहर में ग्राम जैत, बनेठा और जनमासा पहुंचे, उनके साथ चल रहे कार के काफिले ने ग्रामीणों को भौचक्का कर दिया। सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह दोपहर अपने आकस्मिक दौरे के दौरान ग्राम बनेठा पहुंचे। इस संबंध में जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश राजपूत ने बताया कि जिस वक्त नेता प्रतिपक्ष ग्राम बनेठा पहुंचे, यहां पर स्थित एक खदान से भारी मात्रा में रेत पोखलीन मशीनों के माध्यम से निकाली जा रही थी। जिसकी वीडियोग्राफी नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा करवाई गई। साथ ही ग्राम जनमासा और जैत और अन्य क्षेत्रों में भी नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह ने रेत और अन्य खनिज संपदाओं के परिवहन और उत्खनन को कैमरे में कैद करवाया है।
हले भी आया था दल
ऐसा नहीं है कि अवैध खनन की शिकायतों के मद्देनजर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के क्षेत्र में पहली बार दस्तक दी हो, इससे पहले भी कांग्रेसी विधायकों का एक दल मुख्यमंत्री  गृह क्षेत्र में हो रहे उत्खनन और  परिवहन को देखने आया था जिसकी एक विस्तृत रिपोर्ट और वीडियोग्राफी केन्द्र सरकार को भेजी गई थी।

बुधवार, 21 मार्च 2012

नीलाम होगी शुगर फैक्ट्री

  अमित कुईया
सीहोर। पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली के कारण बंद पड़ी बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज कर्ज के चलते कभी भी नीलाम हो सकती है। प्रशासन के अधिकारियों ने फैक्ट्री पर बकाया विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपए की राशि की रिकवरी के लिए कड़ा कदम उठाया है और बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज को कर्ज चुकाने के लिए एक नोटिस भेजा गया है साथ ही फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एक नोटिस चस्पा किया गया है।
गौरतलब है कि बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए बंद हो गई थी। लेकिन जिस वक्त फैक्ट्री का संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को आधा दर्जन से अधिक विभिन्न विभागों को विभिन्न मदों में राशि अदा करना थी जो कि फैक्ट्री प्रबंधन फैक्ट्री बंद होने के सालों बाद भी नहीं चुका पाया है।
प्रशासन ने उठाया कदम
पिछले दिनों सीहोर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री की चार हजार एकड़ से अधिक भूमि को सीलिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित कर लिया था जिसके बाद प्रशासन ने एक ओर कदम उठाते हुए अब फैक्ट्री में विभिन्न विभागों की बकाया राशि की वसूली के लिए फैक्ट्री प्रबंधन पर पिछले सोलह  मार्च को एक नोटिस (मांग पत्र) भेजा है साथ ही बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज के मुख्य द्वार पर प्रशासन ने बकाया राशि की वसूली के लिए एक नोटिस भी चस्पा किया है जिसमें नियत समय में कंपनी की देनदारी चुकाने के निर्देश उल्लेखित है।
दर्जनों विभागों का बकाया
जिस वक्त बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज का सुचारु संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को अपनी जरुरतों के लिए विभिन्न विभागों से मदद की जरुरत पड़ती थी। जिसमें सूत्रों के मुताबिक गन्ना उत्पादन में सिंचाई के लिए पानी की जरुरत पड़ती थी जिसका करीब साढ़े सात लाख रुपए आज भी सिंचाई विभाग को कंपनी द्वारा दिया जाना है। इसी तरह विद्युत वितरण कंपनी का भी करीब 25 से 30 लाख रुपए बकाया है। इसी तरह नगर पालिका का समेकित कर, संपत्ति कर और जल कर का करीब एक करोड़ रुपए बकाया है। कंपनी को मंडी कमेटी और गन्ना विभाग का भी करीब 14 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया भुगतान करना है। यह सभी भुगतान वर्ष 1994 से 95 के समय के जब कंपनी का सुचारु संचालन होता था।
मजदूरों का बकाया 20 करोड़
बीएसआई शुगर इण्स्ट्रीज पर ताले लगने के बाद यहां कार्यरत हजारों मजदूरों का करीब बीस करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान प्रबंधन की लापरवाही के कारण नहीं हो सका है। इस बकाया भुगतान को लेकर मजदूर संगठन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन वर्ष 95-96 में मील प्रबंधन इस याचिका पर स्टे ले आया, लेकिन पंद्रह साल बाद एक बार फिर इस स्टे पर बेकेट मिल गया है जिसके बाद यह तय हो गया है कि मिल प्रबंधन को कंपनी में कार्यरत उन हजारों मजदूरों को पैसा किसी भी सूरत में देना होगा।
कंपनी होगी नीलाम
विश्वत प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि विगत सोलह मार्च को कंपनी पर विभिन्न विभागों और अन्य मदों की बकाया राशि की वसूली के लिए एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद यदि मिल प्रबंधन बकाया राशि देने में न नूकूर करता है तो यह संभवत: यह तय है कि निकट समय में कंपनी के अधिकार क्षेत्र में सीलिंग मुक्त भूमि और शुगर फैक्ट्री की कुर्की कर नीलामी की राशि से यह बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
पहले भी चस्पा हुआ था नोटिस
बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन स्तर पर सन् 1995 में भी कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था लेकिन उस वक्त मिल प्रबंधन नोटिस के विरुद्ध स्टे ले आया जिसके ठीक पंद्रह साल बाद प्रशासन पुन: इस मामले में आगे बढ़ा है और अब कंपनी को एक बार फिर नोटिस जारी करते हुए बकाया भुगतान राशि देने के लिए चेताया गया है।
इनका कहना है
विभिन्न विभागों की सालों से लंबित बकाया राशि के भुगतान के लिए मिल प्रबंधन को एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है।
अल्का एक्का, तहसीलदार सीहोर

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

सिहोर में दुसरे दिन भी जमकर बरसा रंग


सिहोर में बरसो पुराणी परंपरा के चलते आज शुक्रवार को भी जमकर होली खेली गई !बताया जाता है सिहोर में नवाबी शाशन काल क्र दौरान भोपाल नवाब होली पर्व के दुसरे दिन होली खेलने सिहोर आया करते थे तभी से यह परम्परा ईहोरे में चली आ रही है !हलाकि नवाबी शाशनकाल और नवाब तो चले गए चले गए लेकिन उनके द्वारा डाली गई यह परम्परा आज भी सिहोर में चली आ रही है और दुसरे दिन भी जमकर रंग गुलाल उड़ाया जा रहा है

अब खनिज माफियाओं के होंगे हौंसले बुलंद

-मुख्यमंत्री के गृह जिले में खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसने वाले अधिकारी का हुआ था तबादला, मुरैना की घटना के बाद सहमे जिले के अधिकारी
अमित कुइया 
सीहोर। इतिहास के पन्नों में अब तक की सबसे बड़ी खनिज कार्रवाही जिला प्रशासन द्वार बीते कुछ माह पूर्व में दर्ज की गई थी। लेकिन समय के साथ यह कार्रवाही भी खत्म हो गई। अब हालात यह है कि दबंग अधिकारी को दबंग खनिज माफियाओं ने सरकार की चाबूक दिखाकर खामोश कर दिया। और कार्रवाही में जिन खनिज माफियाओं पर जुर्माने लगाए गए वह भी एक बार फिर प्रशासन को न्यायालय में खड़ा करने  की धमकी दे रहे है। यही वजह है कि प्रशासन ने कार्रवाही करते हुए कागजों में जुर्माने की नसीहत तो दे दी लेकिन अब तक इस मामले में एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार जिले में एक बार फिर खनिज माफियाओं का बोलबाला नजर आ रहा है। बीते कुछ माह पूर्व जिला प्रशासन द्वारा एक दबंग अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए तैनात किया गया था और इस अधिकारी ने लगभग छ: अरब रुपए से अधिक के अवैध खनन को पकड़ा था। वहीं सौ से अधिक खनिज माफियाओं की फहरिस्त बनाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसके बाद प्रशासन ने सभी खनिज माफियाओं पर करोड़ों रुपए के जुर्माने लगाए लेकिन प्रशासन अब तक एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं कर सका है जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के आगे प्रशासन का चाबूक छोटा पड़ गया है।
तबादले के फेर में अधिकारी
खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए आईएएस अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं की चाबूक के आगे झुकना पड़ा और उनका तबादला कर दिया गया। लेकिन न्यायालय में अधिकारी ने न्याय मांगा और पुन: स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह तय हो गया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में प्रशासन पर खनिज माफियाराज हावी है।
छ: अरब का अवैध उत्खनन
प्रदेश में कितना अवैध उत्खनन हुआ है कि इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रशासनिक कार्रवाही के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में छ: अरब रुपए का अवैध उत्खनन पाया गया। वहीं कागजी कार्रवाही के बाद यह उत्खनन जारी है। जिससे स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध उत्खनन कहां तक पहुंच चुका है।
सहमे अधिकारी
अवैध उत्खनन कर परिवहन हो रहे खनिज को रोकने जा रहे प्रदेश के मुरैना जिले के एक क्षेत्र में आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार की हत्या के बाद जब सीहोर जिले के उन अधिकारियों से बात की जिन्होंने अवैध उत्खननकर्ताओं पर अंकुश लगाने की कार्रवाही की थी तो वह सहमे सहमे से नजर आए साथ ही उन्होंने अपनी दबी जुबान में स्वीकार किया कि हम शासन से रसूख रखने वाले अवैध उत्खननकर्ताओं के सामने वाकई बोने हंै। वहीं संयुक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा से भी प्रतिक्रिया चाही तो वह कुछ भी कहने से बचते रहे और उन्होंने पूर्व में की गई  कार्यवाही की जानकारी देने से मना कर दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के सामने प्रशासन के आला अधिकारी भी कितने डरे सहमे नजर आ रहे हैं।

गुरुवार, 8 मार्च 2012

आखिर कहां गायब हुई एक हजार जमीन

अमित कुईया
सीहोर। बीते दिनों भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की लगभग चार हजार एकड़ भूमि प्रशासन ने अपने अधीन कर ली है, लेकिन प्रशासन अब अपने ही पैतरे में फंस गया है।  क्योंकि 4 हजार 597 एकड़ अधिग्रहण हुई जमीन में फैक्ट्री के विभिन्न क्षेत्रों में फैली एक हजार एकड़ जमीन लापता है। जो कि प्रशासन को ढूंढने में पसीना आ रहा है।
जानकारी के अनुसार विगत दिनों अनुविभागीय न्यायालय राजस्व के एक निर्णय के बाद भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की करीब 4 हजार 597 एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट 1960 के तहत अधिग्रहित की गई थी। इस पूरे रकबे के खसरे नंबर आदि का मिलान का काम युद्ध स्तर पर प्रशासनिक अमला कर रहा है लेकिन एक मामले में अब प्रशासन को पसीना आ रहा है। क्योंकि प्रशासन ने कागजों में तो भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की भूमि अपने अधीन तो कर ली लेकिन प्रशासन इस पूरी भूमि को अब तक अपने कब्जे में नहीं ले पाया है। वहीं इस पूरी भूमि में से लगभग एक हजार एकड़ जमीन ऐसी है जो कि प्रशासन के सर्वे के दौरान लापता है।
कहां-कहां गायब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की कुल भूमि में से एक हजार एकड़ का रकबा मौके पर तो है लेकिन प्रशासन के सर्वे के दौरान क्षेत्र के सैकड़ाखेड़ी, बडिय़ाखेड़ी, कस्बा और शेखपुरा क्षेत्र में स्थित शुगर फैक्ट्री की यह जमीन नहीं मिल पा रही है।
अदला बदली वाले परेशान
वर्ष 1934 में प्रारंभ हुई भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज के पास तत्कालिक समय में पांच हजार से अधिक एकड़ का रकबा मौजूद था। इस अंतराल में फेक्ट्री संचालक और स्थानीय लोगों के संबंध इतने गहरे हो गए थे कि स्थानीय कुछ लोगों ने आसपास के गांव की अपनी भूमि बीएसआई कंपनी के नाम कर दी तथा इसके बदले में फेक्ट्री की शहर से लगी बेशकीमती जमीन अपने नाम करा ली। लेकिन प्रशासन द्वारा अब जब अधिग्रहण की कार्रवाई की गई तो इन जमीनों पर वर्षों से कब्जा जमाए उन लोगों में हड़कंप मच गया है साथ ही उन लोगों को यह डर सताने लगा है कि इन जमीनों पर वर्षों से काबिज उनका मालिकाना हक कहीं छीन न जाए। जिसके चलते वह सुबह से शाम तक तहसील कार्यालय में डेरा जमाए हुए हैं।

रविवार, 4 मार्च 2012

ड़क हादसों में दो घायल


सीहोर।  जिले के थाना आष्टा एंव इछावर थाना के अन्तर्गत हुए सड़क हादसों में दो लोग घायल हो गए। पुलिस ने सभी मामले कायम कर लिये। जानकारी के अनुसार आष्टा थाना अन्तर्गत ग्राम कोठरी के पास आज सुबह बाइक क्रमांक एमपी-37-एमजी-3222 के चालक ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति से चलाते हुए अजय को पीछे से टक्कर मारकर घायल कर दिया। इधर इछावर अन्तर्गत मोहनपुर लेड़ी के पास 13 फरवरी को बाइक के चालक ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति से चलाते हुए पठारिया बॉका निवासी असरफ आ. कालेखां को टक्कर मारकर घायल कर दिया। वाहन चालकों द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाये जा रहे जिससे दुर्घटनायें बढ़ रही हैं।

हरे वृक्ष का रहे विशेष ध्यान: राय

सीहोर। कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी और पूर्व नपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल के जिला मुय संगठक राकेश राय ने कहा है कि सभी लोग होली का पर्व परंपरागत रुप से मनाएं। पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए श्री राय ने कहा है कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि होली पर्व पर हरे वृक्ष न काटे जाएं और इस पर्व को उत्साह ओर उमंग के साथ मनाया जाए, जिससे आपसी भाईचारा अधिक से अधिक बढ़े।
उल्लेखनीय है कि जिले में कांग्रेस सेवादल के माध्यम से लगभग दस सालों से जल बचाओ जन चेतना अाियान चलाने वाले कांग्रेस नेता राकेश राय लगातार इस बात के प्रयास करते रहें हैं कि पानी अनमोल होता है, उसे बचाने के लिए अधिक से अधिक जागरुकता बढ़े। दस साल पहले जब श्री राय ने यह अभियान शुरु किया था, तब से लेकर आज तक पानी के महत्व को लोगों को बताने के साथ जागरुकता लाने के प्रयास करने वाले श्री राय जिले के एक मात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी इस मुहिम को लगातार न केवल सराहना मिली, बल्कि लोगों ने उनकी बात को स्वेच्छा से स्वीकार भी किया।
पूर्व नपाध्यक्ष सीहोर राकेश राय ने कहा है कि होली पर्व पर रसायन वाले रंगों का उपयोग नहीं होना चाहिए। यह पर्व सभी को अ'छे मार्ग पर चलने का संदेश देता है।

नर्माण कार्यों का निरीक्षण

नगर पालिका प्रेसीडेंट नरेश मेवाडा निर्माण कार्यो का निरिक्षण करते हुए