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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

मंत्री जी की चापलूसी में भगवान को भी नहीं छोड़ा

सिहोर में 7 अप्रेल को नई जेल का उद्घाटन हुआ तो वही जेल प्रशासन ने इस कार्यकर्म में मंत्री जी की चापलूसी में भी कोई कसर बाकी नहीं रखी ! इस कार्यकर्म में वो सबकुछ हुआ जो अफसरशाही अपने सरकारी आकाऔ के लिए करती है ! इस आयोजन में जेल प्रशासन द्वारा अपने विभागीय मंत्री को खुश करने के लिए उनके सम्मान में भगवान को भी नहीं छोड़ा गाया और बरसो पुराने "ॐ जय जगदीश हरे " की जगह जय जगदीश देवड़ा का भजन तोड़ मरोड़ के बना डाला ! हलाकि मंच से गया हुआ ये भजन अब मंत्री और जेल प्रशासन को खासा परेशान भी कर रहा है ! और भाजपा की रीती और निति को बखूबी बयाँ कर रहा है !
हुआ यु की ७ अप्रेल को सिहोर जिला मुख्यालय पर नवनिर्मित उपजेल का उद्घाटन हुआ इस अवसर पर जेल मंत्री जगदीश देवड़ा मुख्य रूप से उपस्थित थे ! जेल प्रशासन द्वारा कार्यकर्म में चार चाँद लगाने के लिए भोपाल के कलाकारों को इस कार्यकर्म में बुलाया था ! उद्घाटन के दौरान भोपाल के कलाकारों द्वारा एक गीत भी प्रस्तुत किया गया इस गीत में कलाकारों ने ॐ जय जगदीश की जगह "ॐ जय जगदीश देवड़ा गाया और मंत्री जी की चापलूसी में कोई कसर बाकी न रखी! यह गीत सुनकर वहा मोजूद हर एक शख्स कुछ देर के लिए तो कुछ समझ नहीं पाया लेकिन गीत तो पूरा हो चूका था और मंत्री भी समझ चुके थे की उनकी तारीफ में गाया ये गीत अब बखेड़ा खड़ा कर सकता है और हुआ भी कुछ ऐसा ही जब इलेक्ट्रोनिक चेनलो से जुड़े पत्रकारों ने गीत की प्रस्तुति के बाद मंत्री जी सवाल किये तो वेह बगले झाकते नजर आये ! अब देखना यह की मंत्री की शान में गाया यह गीत प्रदेश की राजनीती में क्या गुल खिलाता है !

‘सीहोर एक्सप्रेस’ को बचाओ, क्रिकेट के दीवानों


मैं आप सबके साथ ‘सीहोर एक्सप्रेस’ मुनीस अंसारी की कहानी सांझा करना चाहता हूं। जिस पर ना जाने कैसे मध्य प्रदेश में चल रहे तमाम सरकारी गैर सरकारी प्रयासों की नजर अब तक नहीं पड़ी। जबकि इस खिलाड़ी के तेज रफ्तार गेन्द की सनसनाहट को सिर्फ भोपाल ने नहीं बल्कि ऑल इंडिया स्कॉर्पियो स्पीड स्टार कांटेस्ट के माध्यम से देश भर ने महसूस किया। वह राज्य की राजधानी भोपाल से महज 25-30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटे से कस्बे सीहोर से ताल्लुक रखता है। जहाँ में भी रहता हु

उसने भी सीहोर की गलियों में बल्ले और गेन्द के साथ उसी तरह खेलना शुरु किया था जैसे उसके बहुत से साथियों ने किया था। लेकिन वह अपने साथियों की तरह यह खेल सिर्फ टाईम पास के लिए नहीं खेल रहा था। क्रिकेट देखते ही देखते उसके लिए जुनून बन गया।

सीहोर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाला मुनीस कभी सीहोर एक्सप्रेस नहीं बनता, यदि उसे स्पीड स्टार कांटेस्ट की जानकारी नहीं मिलती। सीहोर की गलियों के इस तेज गेन्दबाज के गेन्द का सामना करने के लिए मुम्बई के एक बड़े से मैदान में स्पीड स्टार मुकाबले के फाइनल में हरभजन सिंह उतरे। सिहोर एक्सप्रेस की पहली गेन्द को हरभजन समझ नहीं पाए और उनके तीनों विकेट हवा में बिखर गए। दूसरी गेन्द में हरभजन के हाथ का बल्ला दो टूकड़ों में बंट गया और तीसरी गेन्द पर हरभजन के हाथ का बल्ला छीटक कर दूर जा गिरा। मुनिस उस दिन 134 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेन्द फेंक रहे थे। उनके गेन्द की अधिकतम रफ्तार 145 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। जिसे खेल पाना किसी भी बल्लेबाज के लिए मुश्किल की बात होगी। उसकी गेन्दबाजी की प्रतिभा को देखकर मैदान में मौजूद उस समय भारतीय टीम के कोच ग्रेग चैपल, कप्तान राहुल द्रविड़, वसीम अकरम, जोन्टी रोट्स, और किरण मोरे खासे प्रभावित हुए। दक्षिण अफ्रिका के खिलाड़ी जोंटी रोट्स ने तो मुनीस के खेल को देखकर क्षेत्र रक्षण (फिल्डिंग) के लिए दस में से नौ अंक दिए। बावजूद इसके मध्य प्रदेश की सरकार ने उसे आज तक रणजी खेलने के लायक भी नहीं समझा।
यह वाकई अफसोसजनक पहलु है की तेज गेंदबाजी के हुनर में माहिर इस शानदार गेंदबाज की प्रतिभा के वावजूद भी इसे अबतक मध्यप्रदेश सरकार ने किसी तरह की सुविधा नहीं दी नहीं तो भारतीय क्रिकेट के मानचित्र पर सीहोर भी निश्चित तौर पर चमकता नजर आता !