sehore

Make animated glitter text scraps www.pigimail.com

मंगलवार, 15 जनवरी 2013

संगीनों के साए में हुआ अंतिम संस्कार

रास्ते के विवाद को लेकर दो घंटे तक रखा रहा वृद्ध का शव


रास्ते में रखा वृद्ध का शव 
सीहोर। जिला मु यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खामलिया में मंगलवार की सुबह उस समय अप्रिय स्थिति निर्मित हो गई, जब गांव के एक वृद्ध की शवयात्रा के दौरान दो ग्रामीण पुरानी रंजिश को लेकर आमने- सामने आ गए। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से खुलकर घातक हथियारों का उपयोग किया गया। नतीजतन शवयात्रा में शामिल ग्रामीणों ने शव को रास्ते में रखकर अपना विरोध प्रकट किया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मौके की स्थिति को नियंत्रण में किया और उसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार किया गया।
प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के दोराहा थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम खामलिया निवासी 70 वर्षीय जयकिशन नामक वृद्ध का निधन हो गया था। मंगलवार की सुबह जब वृद्ध की शवयात्रा निकाली जा रही थी तभी रास्ते में गांव के पूर्व सरपंच मनोहर सिंह और शवयात्रा में शामिल रमेश नामक ग्रामीण का पूर्व की रंजिश को लेकर विवाद हो गया।
और निकल आए हथियार
बताया जाता है कि पूर्व सरपंच मनोहर सिंह का गांव के ही रमेश व अन्य लोगों से पुरानी रंजिश चली आ रही है। शवयात्रा जब पूर्व सरपंच मनोहर सिंह के घर के समीप से निकल रही थी तब उसने रमेश सहित अन्य ग्रामीणों से कहा कि संभलकर निकलना, कहीं कंडे न टूट जाएं। इस बात को लेकर रमेश व मनोहर में विवाद होने लगा। स्थिति उस समय और विकट हो गई जब दोनों पक्षों की ओर से ग्रामीण घातक हथियारों के साथ आमने- सामने आ गए। इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा खुलकर हथियारों का उपयोग किया गया। नतीजतन पूर्व सरपंच मनोहर व रमेश सहित अन्य ग्रामीणों को चोटें आईं।
रास्ते में रख दिया शव
इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने वृद्ध के शव को रास्ते में ही रख दिया और अपना विरोध प्रकट करने लगे। घटना की सूचना मिलने के बाद दोराहा थाना प्रभारी दिनेश सिंह चौहान भारी पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाईश देते हुए स्थिति को काबू में किया। आखिरकार ग्रामीण मान गए और वह वृद्ध का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गए। वृद्ध का अंतिम संस्कार किए जाते समय भारी पुलिस बल श्मशान घाट पर मौजूद था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वृद्ध का शव दो घंटे तक रास्ते में ही रखा रहा।
इनका- इनका कहना
गांव के वृद्ध जयकिशन की शवयात्रा जब पूर्व सरपंच मनोहर सिंह के घर के समीप से निकल रही थी तभी मनोहर सिंह ने शवयात्रा को उसके घर के पास से निकलने का विरोध किया। उसका कहना था कि यह जमीन सरकारी नहीं है। इसका मालिक वह है।
माखन सिंह मेवाड़ा
ग्रामीण, खामलिया
मैंने कभी किसी शवयात्रा को मेरी जमीन से निकलने के लिए मना नहीं किया, लेकिन गांव के रमेश व उसके साथी जानबूझकर मेरे कंडों को कुचलकर निकल रहे थे। मैंने मना किया तो वह लड़ाई पर उतारू हो गए।
मनोहर सिंह मेवाड़ा
पूर्व सरपंच ग्राम खामलिया
शवयात्रा के दौरान ग्रामीणों के दो गुटों में पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मामले का पटाक्षेप किया और वृद्ध का सस मान अंतिम संस्कार कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
अमित सक्सेना
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

रविवार, 13 जनवरी 2013

                                                " मोहे  पडन  दो       बाबूल अभी न ब्याहो..".
               .............नाबलिग ने बालिका वधू बनने से किया इंकार

       अमित कुईया 

छात्रा प्रियंका छात्रावास सह अधीक्षक श्रीमती सुशीला चौरसिया के साथ 
सीहोर। बाबा! अभी मेरी पढऩे की उम्र है,अ भी मेरे हाथ पीले मत करो। यह मार्मिक गुहार लगा रही है ग्राम जमोनिया टैंक स्थित बालिका छात्रावास में रहकर कक्षा आठवीं की पढ़ाई करने वाली 13 वर्षीय ग्रामीण छात्रा प्रियंका मेवाड़ा, जिसके पिता उसे कम उम्र में ही बालिका वधु बनाने पर आमादा है।
    मामला जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जमोनिया टैंक में जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित शासकीय बालिका छात्रावास का है, जंहा  कक्षा आठवीं में पढने करने वाली ग्राम दुपाडिय़ा दांगी निवासी प्रियंका मेवाड़ा की शादी उसका पिता 13 साल की कच्ची उम्र में करने पर आमदा है लेकिन इसे प्रियंका का साहस ही कहेंगे की वह अपने पिता की इस जिद के आगे भी मजबूत खड़ी  रही और उसने अपने पिता की गैर क़ानूनी जिद की जानकारी  छात्रावास संचालको सहित जिम्मेदारो को बताई 
 मीडिया को बताई व्यथा 
ग्राम दुपाडिय़ा दांगी निवासी चांद सिंह की 13 वर्षीय पुत्री प्रियंका मेवाड़ा ग्राम जमोनिया टैंक के बालिका छात्रावास में रहकर कक्षा आठवीं की पढ़ाई कर रही है।  रविवार को छात्रावास पहुंचे इस संवाददाता को अपनी व्यथा सुनाते हुए निडर छात्रा प्रियंका ने बताया कि उसके पिता चांद सिंह मेवाड़ा 13 वर्ष की उम्र में ही उसके हाथ पीले करना चाह रहे हैं, जबकि वह अभी शादी न करते हुए आगे और पढ़ाई करने के सपने संजोए है।
छात्रावास की छत पर चढ़ी
मासूम मगर साहसी छात्रा प्रियंका ने बताया कि गत 8 जनवरी को उसके पिता चांदसिंह मेवाड़ा उसे लेने छात्रावास आए थे, लेकिन कम उम्र में अपनी शादी का विरोध कर रही प्रियंका उनसे बचने के लिए छात्रावास की तीसरी मंजिल पर जाकर छुप गई थी। उसे पता था कि अगर वह पिता के साथ घर चली गई तो वह उसकी शादी कराकर ही दम लेंगे, लेकिन   छात्रावास पहुंचा उसका पिता चांदसिंह उसे लेकर जाने की जिद पर अड़ा हुआ था और इस दौरान उसकी बहस छात्रावास की सह अधीक्षक श्रीमती सुशीला चौरसिया से भी बहस हो गई। आखिर उसने लिखित में आश्वासन दिया कि वह अपनी बड़ी पुत्री  प्रीति की विवाह रस्म के लिए प्रियंका को ले जा रहा है, तथा वह उसकी शादी नहीं करेगा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्रावास प्रबंधन ने उसे पिता के साथ जाने दिया।
...........और करा दी लग्र
लिखित आश्वासन देने के बाद भी चांदसिंह मेवाड़ा अपनी पुत्री प्रियंका को गांव ले गया और बकौल प्रिंयका के उसकी भी बहन के साथ लग्र की रस्म अदा कर दी।  इसके बाद 11 जनवरी को प्रिंयका का फुफा अशोक उसे वापस छात्रावास में छोड़ गया। छात्रावास पहुंचकर प्रियंका ने सारा वाक्या छात्रावास की सह अधीक्षिका श्रीमती सुशीला चौरसिया को बताया। इस पर श्रीमती चौरसिया ने जिला शिक्षा केन्द्र समन्वयक अशोक पराड़कर को पूरे वाक्ये से अवगत कराया। इस दौरान छात्रा ने भी लिखकर दिया कि वह अभी शादी नहीं करना चाहती है।
23 को होना है शादी
प्रियंका मेवाड़ा ने बताया कि उसके पिता ने ग्राम छतरी निवासी एक युवक से शादी तय कर दी है और आगामी 23 जनवरी को उसके पिता उसकी शादी करा देंगे।  इस मामले को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने में छात्रावास की सह अधीक्षिका श्रीमती सुशीला चौरसिया एवं गांव की जागरूक सरपंच श्रीमती गीता राठौर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इनका कहना है
छात्रावास की सह अधीक्षिका ने मुझे इस बारे में बताया था तो मैंने बालिका के पिता चांदसिंह मेवाड़ा को बुलाकर उसे समझाईश दी है और उसने लिखित में आश्वासन भी दिया है कि वह अपनी नाबालिग पुत्री प्रियंका की शादी नहीं करेगा। इसके बाद भी अगर वह प्रियंका की शादी करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज कराया जाएगा।
अशोक पराड़कर
डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र

25 हजार रूपए में एक रात की दूल्हन
              जिले में शादी के नाम पर महिलाओं की तस्करी
                         ..........................      ग्राम मगरखेड़ा से लौटकर (अमित कुईया )
सीहोर। मूक मवेशियों की तरह अब महिलाएं भी शादी के नाम पर बिकने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला मगरखेड़ा में देखने को मिला है जहां मानव तस्कर गिरोह ने एक ग्रामीण को 25 हजार रूपए में एक महिला बेच दी, लेकिन वह महिला ग्रामीण के चुंगल से भागने का प्रयास कर रही थी पर ग्रामीण ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। हैरत की बात यह है कि पुलिस ने महिला को खरीदने वाले ग्रामीण को फरियादी बनाते हुए महिला को आरोपी सिद्ध कर दिया और उसे जेल पहुंचा दिया है।
जिले में इन दिनों महिलाओं को अच्छे घर में शादी कराने का झांसा देकर बेचने वाला गिरोह सक्रिय है। ऐसा ही एक हैरतअंगेज मामला मुख्यमंत्री के गृह जिले में देखने को मिला है। प्राप्त जानकारी अनुसार समीपस्थ ग्राम मगरखेड़ा निवासी कमलेश गौर आत्मज देवबगस गौर के पास गत दिनों दो पुरूष मनोहर एवं मानसिंह तथा एक महिला आशबाई आए थे। उन्होंने कमलेश को झांसा दिया कि वह अगर उन्हें 25 हजार रूपए दे तो वह एक महिला से उसकी शादी करा सकते हैं। अपनी पत्नी से अलगाव होने के बाद अकेले रह रहे कमलेश गौर ने उनकी बात सुनकर रजामंदी जाहिर कर दी तो अगले दिन मानसिंह, मनोहर और आशाबाई 24 वर्षीय एक महिला  सीमाबाई को लेकर उसके पास आए।
और खरीद ली पत्नी
कमलेश ने सीमाबाई को देखने के बाद उससे शादी करने की मंजूरी देते हुए मानसिंह, मनोहर और आशाबाई के हाथ में 25 हजार रूपए रखते हुए सीमाबाई को खरीद लिया। इसके बाद वह तीनों लोग सीमाबाई और कमलेश को लेकर सीहोर जिला न्यायालय लेकर पहुंचे और एक वकील के माध्यम से उनकी कोर्ट मैरिज करा दी। इसके बाद कमलेश अपनी नव विवाहिता सीमाबाई को लेकर अपने गांव मगरखेड़ा लौट आया और दोनों ने एक- दूजे के साथ रात गुजारी।
पर रास न आया साथ
खुद को 25 हजार रूपए में बेचे जाने से आहत सीमाबाई ने किसी तरह रात तो कमलेश के साथ गुजारी लेकिन अगले ही दिन उसने कमलेश से पीछा छुड़ाने के उद्देश्य से पेट दर्द का बहाना बनाया तो कमलेश उसे अपने साथ लेकर श्यामपुर स्थित स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचा। उपचार के बाद जब कमलेश सीमाबाई को लेकर वापस गांव लौट रहा था तभी रास्ते में सीमाबाई ने उसके चुंगल से भागने का प्रयास किया, लेकिन कमलेश ने उसे पकड़  लिया। इस दौरान तमाशबीनों की भीड़ जमा हो गई और उन दोनों को पुलिस अपने साथ चौकी पर ले आई। पुलिस ने यहां कमलेश की शिकायत पर बेची गई महिला को ही आरोपी मानते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया और उसे बेचने वाले आरोपियों का सहभागी मानते हुए भादवि की   धारा 384, 385, 420, 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने सीमाबाई को पूछताछ के बाद जेल पहुंचा दिया है और उसे बेचने वालों की तलाश प्रारंभ कर दी है।
                                                               कमलेश को साफ बचाया
यह वह युवक कमलेश है  जो शादी के नाम ठगा गया 
पुलिस की एकतरफा कार्रवाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने 25 हजार रूपए में महिला को खरीदने वाले कमलेश को आरोपी न मानते हुए फरियादी बनाया है, जबकि महिला की खरीद- फरोख्त के मामले में उस पर भी आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना था।
इ नका कहना है
पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई महिला उस गिरोह की साथी है जो शादी के नाम पर लोगों को ठगते हैं। आरोपी महिला सीमाबाई को जेल पहुंचा दिया गया है और उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।
आलोक सोनी
श्यामपुर पुलिस चौकी प्रभारी

मंगलवार, 8 जनवरी 2013

18 बच्चियों की अनुपस्थिति पर आयोग की अध्यक्ष ने मांगा जवाब
सीहोर। मुख्यालय पर मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास का मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने छात्रावास में रह रही बच्चियों के हाल जानें, तो वहीं छात्रावास की अव्यवस्थाओं के खिन्न होकर उन्होंने जिम्मेदारों को फटकार भी लगाई। साथ ही उन्होंने इन बच्चियों को बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी नाखुशी जाहिर की, तो इधर छात्रावास में उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियों की अनुपस्थिति को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया।
मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी मुख्यालय पर स्थित एनजीओ द्वारा संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास केंद्र पर पहुंची। यहां उन्होंने मानसिक विकलांग बच्चियों के संचालित इस छात्रावास की व्यवस्थाओं को देखा, तो वहीं उन्होंने छात्रावास में अन्य जरुरी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। अपने निरीक्षण के दौरान श्रीमती चतुर्वेदी ने मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तो उन्हें हर जगह अव्यवस्थाएं नजर आईं, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए आयोग की अध्यक्ष ने छात्रावास की जिम्मेदारों और अन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए।
ठिठुर रही थीं बच्चियां
मंगलवार को जिस वक्त बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी निरीक्षण के लिए ब्राईट स्टार छात्रावास पहुंची तो उन्होंने देखा कि यहां पर रह रहीं मानसिक विकलांग बच्चियों को ठंड से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं और बच्चियां उनके निरीक्षण के दौरान गरम कपड़ों के अभाव में ठिठुरती हुई नजर आईं, जिस पर आयोग अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने नाराजगी जाहिर करते हुए डीपीसी से जवाब-तलब किया है।
होती है मारपीट
आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अपने निरीक्षण के दौरान यहां पर रह रही मानसिक विकलांग बच्चियों से व्यवस्थाओं को लेकर बंद कमरे में जब जानकारी ली तो इन बच्चियों ने कहा कि हमारे साथ मारपीट की जाती है, साथ ही हमें डराया-धमकाया भी जाता है। इस मामले में आयोग की अध्यक्ष ने आठ बच्चियों के बयान दर्ज किए हैं, साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले में जांच की जाए।
बूढ़े कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने निरीक्षण के दौरान छात्रावास की वार्डन एवं अन्य कर्मचारियों के बारे में जब जानकारी चाही तो यह बात सामने आई कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में 28 बच्चियों की सुरक्षा का जिम्मा एक बुजुर्ग वार्डन के जिम्मे है। जिसके बाद यह साफतौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी इस छात्रावास में किसी तरह की अनहोनी इन बच्चियों के साथ होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
मध्यान्ह भोजन पर उठी उंगलियां
बाल आयोग की अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने आज अपने निरीक्षण के दौरान उस स्कूल का दौरा भी किया जहां पर मानसिक विकलांग छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है। आयोग अध्यक्ष जिस वक्त मनु बेन स्कूल में निरीक्षण के दौरान पहुंची तो उन्होंने यहां बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी सवाल खड़े कर दिए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को ताकीद की कि व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाए।
क्यों अनुपस्थित हैं बच्चियां?
गौरतलब है कि ब्राईट स्टार छात्रावास जो कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित है, इस छात्रावास में शिकायतों के बाद पिछले दिनों एसडीएम हृदेश श्रीवास्तव ने निरीक्षण किया था, इस निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि छात्रावास में करीब 16 बच्चियां पिछले लंबे समय से अनुपस्थित हैं, जिसको लेकर एसडीएम श्री श्रीवास्तव ने एक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी, लेकिन मजेदार बात यह है कि इस निरीक्षण के ठीक कुछ दिन बात बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी के निरीक्षण के दौरान इन बच्चियों की उपस्थिति मंगलवार को भी नजर नहीं आई। जिसके बाद मंगलवार को बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अनुपस्थित मानसिक विकलांग बच्चियों का छात्रावास में न रहने पर न केवल जानकारी चाही है, बल्कि डीपीसी के जिम्मेदारों से इस पूरे मामले में जल्दी ही जांच प्रतिवेदन तैयार कर शासन स्तर पर भेजने के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि श्रीमती चतुर्वेदी के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले में छात्रावास के संचालकों के खिलाफ क्या कड़ा रुख अख्तियार किया जाता है।
इनका कहना है
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने आज छात्रावास का निरीक्षण किया है। कई तरह की अव्यवस्थाएं सामने आई हैं, जिसके बाद छात्रावास संचालक को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियां अनुपस्थिति पाई गई हैं, जिसको लेकर उन्होंने जवाब मांगा है। इस मामले में सत्यापन रिपोर्ट शासन स्तर पर सौंपी जाएगी।
अशोक पराडकर
डीपीसी, सीहोर