18 बच्चियों की अनुपस्थिति पर आयोग की अध्यक्ष ने मांगा जवाब
सीहोर। मुख्यालय पर मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास का मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने छात्रावास में रह रही बच्चियों के हाल जानें, तो वहीं छात्रावास की अव्यवस्थाओं के खिन्न होकर उन्होंने जिम्मेदारों को फटकार भी लगाई। साथ ही उन्होंने इन बच्चियों को बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी नाखुशी जाहिर की, तो इधर छात्रावास में उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियों की अनुपस्थिति को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया।
मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी मुख्यालय पर स्थित एनजीओ द्वारा संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास केंद्र पर पहुंची। यहां उन्होंने मानसिक विकलांग बच्चियों के संचालित इस छात्रावास की व्यवस्थाओं को देखा, तो वहीं उन्होंने छात्रावास में अन्य जरुरी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। अपने निरीक्षण के दौरान श्रीमती चतुर्वेदी ने मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तो उन्हें हर जगह अव्यवस्थाएं नजर आईं, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए आयोग की अध्यक्ष ने छात्रावास की जिम्मेदारों और अन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए।
ठिठुर रही थीं बच्चियां
मंगलवार को जिस वक्त बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी निरीक्षण के लिए ब्राईट स्टार छात्रावास पहुंची तो उन्होंने देखा कि यहां पर रह रहीं मानसिक विकलांग बच्चियों को ठंड से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं और बच्चियां उनके निरीक्षण के दौरान गरम कपड़ों के अभाव में ठिठुरती हुई नजर आईं, जिस पर आयोग अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने नाराजगी जाहिर करते हुए डीपीसी से जवाब-तलब किया है।
होती है मारपीट
आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अपने निरीक्षण के दौरान यहां पर रह रही मानसिक विकलांग बच्चियों से व्यवस्थाओं को लेकर बंद कमरे में जब जानकारी ली तो इन बच्चियों ने कहा कि हमारे साथ मारपीट की जाती है, साथ ही हमें डराया-धमकाया भी जाता है। इस मामले में आयोग की अध्यक्ष ने आठ बच्चियों के बयान दर्ज किए हैं, साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले में जांच की जाए।
बूढ़े कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने निरीक्षण के दौरान छात्रावास की वार्डन एवं अन्य कर्मचारियों के बारे में जब जानकारी चाही तो यह बात सामने आई कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में 28 बच्चियों की सुरक्षा का जिम्मा एक बुजुर्ग वार्डन के जिम्मे है। जिसके बाद यह साफतौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी इस छात्रावास में किसी तरह की अनहोनी इन बच्चियों के साथ होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
मध्यान्ह भोजन पर उठी उंगलियां
बाल आयोग की अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने आज अपने निरीक्षण के दौरान उस स्कूल का दौरा भी किया जहां पर मानसिक विकलांग छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है। आयोग अध्यक्ष जिस वक्त मनु बेन स्कूल में निरीक्षण के दौरान पहुंची तो उन्होंने यहां बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी सवाल खड़े कर दिए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को ताकीद की कि व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाए।
क्यों अनुपस्थित हैं बच्चियां?
गौरतलब है कि ब्राईट स्टार छात्रावास जो कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित है, इस छात्रावास में शिकायतों के बाद पिछले दिनों एसडीएम हृदेश श्रीवास्तव ने निरीक्षण किया था, इस निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि छात्रावास में करीब 16 बच्चियां पिछले लंबे समय से अनुपस्थित हैं, जिसको लेकर एसडीएम श्री श्रीवास्तव ने एक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी, लेकिन मजेदार बात यह है कि इस निरीक्षण के ठीक कुछ दिन बात बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी के निरीक्षण के दौरान इन बच्चियों की उपस्थिति मंगलवार को भी नजर नहीं आई। जिसके बाद मंगलवार को बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अनुपस्थित मानसिक विकलांग बच्चियों का छात्रावास में न रहने पर न केवल जानकारी चाही है, बल्कि डीपीसी के जिम्मेदारों से इस पूरे मामले में जल्दी ही जांच प्रतिवेदन तैयार कर शासन स्तर पर भेजने के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि श्रीमती चतुर्वेदी के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले में छात्रावास के संचालकों के खिलाफ क्या कड़ा रुख अख्तियार किया जाता है।
इनका कहना है
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने आज छात्रावास का निरीक्षण किया है। कई तरह की अव्यवस्थाएं सामने आई हैं, जिसके बाद छात्रावास संचालक को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियां अनुपस्थिति पाई गई हैं, जिसको लेकर उन्होंने जवाब मांगा है। इस मामले में सत्यापन रिपोर्ट शासन स्तर पर सौंपी जाएगी।
अशोक पराडकर
डीपीसी, सीहोर
सीहोर। मुख्यालय पर मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास का मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने छात्रावास में रह रही बच्चियों के हाल जानें, तो वहीं छात्रावास की अव्यवस्थाओं के खिन्न होकर उन्होंने जिम्मेदारों को फटकार भी लगाई। साथ ही उन्होंने इन बच्चियों को बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी नाखुशी जाहिर की, तो इधर छात्रावास में उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियों की अनुपस्थिति को लेकर भी उन्होंने अधिकारियों को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया।
मंगलवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी मुख्यालय पर स्थित एनजीओ द्वारा संचालित ब्राईट स्टार छात्रावास केंद्र पर पहुंची। यहां उन्होंने मानसिक विकलांग बच्चियों के संचालित इस छात्रावास की व्यवस्थाओं को देखा, तो वहीं उन्होंने छात्रावास में अन्य जरुरी व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। अपने निरीक्षण के दौरान श्रीमती चतुर्वेदी ने मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तो उन्हें हर जगह अव्यवस्थाएं नजर आईं, जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए आयोग की अध्यक्ष ने छात्रावास की जिम्मेदारों और अन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए।
ठिठुर रही थीं बच्चियां
मंगलवार को जिस वक्त बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी निरीक्षण के लिए ब्राईट स्टार छात्रावास पहुंची तो उन्होंने देखा कि यहां पर रह रहीं मानसिक विकलांग बच्चियों को ठंड से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं और बच्चियां उनके निरीक्षण के दौरान गरम कपड़ों के अभाव में ठिठुरती हुई नजर आईं, जिस पर आयोग अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने नाराजगी जाहिर करते हुए डीपीसी से जवाब-तलब किया है।
होती है मारपीट
आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अपने निरीक्षण के दौरान यहां पर रह रही मानसिक विकलांग बच्चियों से व्यवस्थाओं को लेकर बंद कमरे में जब जानकारी ली तो इन बच्चियों ने कहा कि हमारे साथ मारपीट की जाती है, साथ ही हमें डराया-धमकाया भी जाता है। इस मामले में आयोग की अध्यक्ष ने आठ बच्चियों के बयान दर्ज किए हैं, साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले में जांच की जाए।
बूढ़े कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने निरीक्षण के दौरान छात्रावास की वार्डन एवं अन्य कर्मचारियों के बारे में जब जानकारी चाही तो यह बात सामने आई कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित इस छात्रावास में 28 बच्चियों की सुरक्षा का जिम्मा एक बुजुर्ग वार्डन के जिम्मे है। जिसके बाद यह साफतौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी इस छात्रावास में किसी तरह की अनहोनी इन बच्चियों के साथ होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
मध्यान्ह भोजन पर उठी उंगलियां
बाल आयोग की अध्यक्ष श्रीमती चतुर्वेदी ने आज अपने निरीक्षण के दौरान उस स्कूल का दौरा भी किया जहां पर मानसिक विकलांग छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है। आयोग अध्यक्ष जिस वक्त मनु बेन स्कूल में निरीक्षण के दौरान पहुंची तो उन्होंने यहां बंटने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी सवाल खड़े कर दिए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को ताकीद की कि व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाए।
क्यों अनुपस्थित हैं बच्चियां?
गौरतलब है कि ब्राईट स्टार छात्रावास जो कि मानसिक विकलांग बच्चियों के लिए संचालित है, इस छात्रावास में शिकायतों के बाद पिछले दिनों एसडीएम हृदेश श्रीवास्तव ने निरीक्षण किया था, इस निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि छात्रावास में करीब 16 बच्चियां पिछले लंबे समय से अनुपस्थित हैं, जिसको लेकर एसडीएम श्री श्रीवास्तव ने एक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी, लेकिन मजेदार बात यह है कि इस निरीक्षण के ठीक कुछ दिन बात बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी के निरीक्षण के दौरान इन बच्चियों की उपस्थिति मंगलवार को भी नजर नहीं आई। जिसके बाद मंगलवार को बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा चतुर्वेदी ने अनुपस्थित मानसिक विकलांग बच्चियों का छात्रावास में न रहने पर न केवल जानकारी चाही है, बल्कि डीपीसी के जिम्मेदारों से इस पूरे मामले में जल्दी ही जांच प्रतिवेदन तैयार कर शासन स्तर पर भेजने के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि श्रीमती चतुर्वेदी के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले में छात्रावास के संचालकों के खिलाफ क्या कड़ा रुख अख्तियार किया जाता है।
इनका कहना है
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने आज छात्रावास का निरीक्षण किया है। कई तरह की अव्यवस्थाएं सामने आई हैं, जिसके बाद छात्रावास संचालक को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनके निरीक्षण के दौरान 18 बच्चियां अनुपस्थिति पाई गई हैं, जिसको लेकर उन्होंने जवाब मांगा है। इस मामले में सत्यापन रिपोर्ट शासन स्तर पर सौंपी जाएगी।
अशोक पराडकर
डीपीसी, सीहोर

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