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रविवार, 8 अप्रैल 2012

534 गांव, 72 में दिखा जलसंकट

अमित कुईया
सीहोर। तहसील के साथ ही संपूर्ण जिले में मार्च के अंतिम सप्ताह में जलसंकट ने गंभीर रूप इतियार कर लिया है। सीहोर नगर के आसपास के गांवों मेंं ही पानी का टोटा हो गया है, दूरस्थ गांवों की हालत ओर अधिक खराब है, इधर जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को यह जलसंकट या तो नजर नहीं आ रहा है या फिर वह अपने आंकड़ो में इस जलसंकट को छिपाने का प्रयास कर रहा है।
विभाग द्वारा जलसंकट को लेकर तैयार कार्ययोजना तो कम से कम इसी ओर इशारा कर रही है। विभाग को सीहोर तहसील के केवल बीस गांवों व जिले के हजार में से 70 गांवों में ही जलसंकट दिखाई दिया। विभाग ने 534 गांवों के लिए तीन करोड़ की योजना बनाई है, लेकिन यह योजना जब तक अमलीजामा पहनेगी जलसंकट भयावह रूप ले चुका होगा।
534 गांवो में जलसंकट, 72 में परिवहन
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सूत्रों की माने तो विभाग द्वारा जो प्रारभिंक सर्वे के बाद जलसंकट की कार्ययोजना बनाई है, उसमें जिले में 534 गांवों में जलसंकट की स्थिति पाई गई है। इस जलसंकट से निपटने के लिए तीन करोड़ की भारीभरकम राशि का प्रावधान भी किया गया है, लेकिन यह राशि कहां और कैसे खर्च होगी नहीं बताया गया, कार्ययोजना पर काम भी एक अप्रैल के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इधर कार्ययोजना मेें जिले के मात्र 72 गांवों में ही पेयजल परिवहन की स्थिति पाई गई है। जिनके लिए बीस लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। बताया जा रहा है कि यह सर्वे फरवरी माह में किया गया था, जिसके आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई, लेकिन एक महीने बाद ही जिलेभर में जलसंकट की स्थिति दोगुनी तक हो गई।
12 सौ से अधिक हैण्डपंप सूखे
जिले की पांचो तहसीलों में पीएचई विभाग द्वारा किए गए सर्वे में चौकाने वाली बातें सामने आई है। विभाग की ही माने तो जिले के 1220 से अधिक हैण्डपंप जलस्तर नीचे पहुंच जाने के कारण सूख चुके है। विभाग अब इनमें पाइप बढ़ाने की बातें कर रहा है, लेकिन यह पाइप कब बढ़ाए जाएगें विभाग नहीं बता पा रहा है।
पचामा, शिवपुरी, सेवनियां में जलसंकट
जिला मुख्यालय की पांच से दस किलोमीटर की सीमा में स्थित कई गांवों में जलसंकट मार्च के अंतिम सप्ताह में गंभीर रूप धारण कर चुका है। गांवों के हैण्डपंप और कुए सूखे चुके है, ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को दो-दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। मुयालय के नजदीक स्थित ग्राम पचामा हो या काहिरी मार्ग पर पडऩे वाला शिवपुरी या सीवन नदी के किनारे बसा गांव सेवनिया, तीनों ही गांवों में पानी की स्थिति गंाीर हो गई है। पचामावासी एक किलोमीटर दूर राजपूत कृषि फार्म से पानी ले जा रहे है तो शिवपुरी वासी दो किलोमीटर दूर से, सेवनियां में नदी के अंदर लगे हैण्डपंप सूख चुके है।

सौ फिट गहराया भूल स्तर

भूजल सर्वेक्षण विभाग के आंकड़ों को माने तो पिछले दो महीने में ही जलसंकट तीन गुना तक बढ़ गया है। जनवरी में भूजल का आंकड़ा जहां 10 से 12 मीटर तक नीचे आंका गया था तो मार्च के तीसरे सप्ताह में किए गए आंकड़े तीन गुना तक ज्यादा नीचे पहुंच गए थे। बीस मार्च तक लिए गए आंकडो में जिले में भूजल स्तर 30 से 32 मीटर तक नीचे उतर गया था। आंकड़े जिले में दिनों दिन गहराते जलसंकट की ओर इशारा कर रहे है। मार्च में सौ फिट तक भूजल का नीचे जाना खतरे की घंटी बजा रहा है।

बुधवार, 4 अप्रैल 2012

ग्रामीणों की नींद को राहत दिलाने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष

अमित कुईया
सीहोर। रात भर रेत निकालती पोखलीन मशीनों की गडग़ड़ आवाजें, रेत का परिवहन करते ट्रक ग्राम जनमासा और बनेठा के ग्रामीणों के लिए पिछले लंबे समय से परेशानी का सबब बने हुए हैं। इन परेशानियों से दो-चार हो रहे ग्रामीणों ने आखिरकार अपनी गुहार प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से लगाई और इन ग्रामीणों की गुहार के बाद मंगलवार को नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस कांग्रेसी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री के ग्राम जैत और ग्राम जनमासा एवं बनेठा पहुंचे। जहां उन्होंने हो रहे रेत खनिज संपदाओं के खनन और परिवहन की वीडियोग्राफी करवाई। अब देखना यह है कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के क्षेत्र में दी गई अचानक दस्तक से राजनीति कितनी उफान मारती है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में पिछले कुछ माह से खनिज के उत्खनन को लेकर पूरे प्रदेश भर में राजनीति गरमाई हुई है। लेकिन इस गरमाई राजनीति के बीच एक रोचक तथ्य यह भी है कि जिले के दुरस्थ और मुख्यमंत्री के ग्राम जैत के आसपास रेत और अन्य खनिज संपदाओं का भंडार हैं। जिसके चलते यहां पर दिन और रात इसका खनन का कार्य सुचारु चलता है। ग्राम जैत से सटे ग्राम जनमासा और बनेठा के ग्रामीण यहां हो रहे दिन और रात रेत के परिवहन और खनन में उपयोग आने वाले संसाधनों की आवाज से रात भर चैन की नींद नहीं सो पाते हैं। इन सब परेशानियों के बीच पिछले दिनों ग्राम बनेठा और जनमासा के ग्रामीणों ने अपनी शिकायत भोपाल पहुंचकर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को सुनाई। जिसके बाद बीते मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस कांग्रेसी विधायकों के साथ औचक तरीके से ग्राम जैत, बनेठा, जनमासा सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। हालांकि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इन ग्रामों में आने से पहले इस बात का ख्याल जरुर रखा होगा कि ग्रामीणों की परेशानी अपनी जगह है लेकिन शायद उनके मन में यह बात भी आ रही होगी कि ग्रामीणों की शिकायत के मद्देनजर उनके हाथ कुछ ऐसे अहम तथ्य हाथ लग जाए जिससे  कि वे चर्चाओं में चल रहे अवैध उत्खनन के मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमी पैदा कर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकें। यह चर्चा नेताप्रतिपक्ष के अचानक हुए दौरे के बाद राजनैतिक गलियारों में चलती रही।
हुई वीडियोग्राफी
मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपने दस साथी विधायकों के साथ जैसे ही अचानक दोपहर में ग्राम जैत, बनेठा और जनमासा पहुंचे, उनके साथ चल रहे कार के काफिले ने ग्रामीणों को भौचक्का कर दिया। सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह दोपहर अपने आकस्मिक दौरे के दौरान ग्राम बनेठा पहुंचे। इस संबंध में जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश राजपूत ने बताया कि जिस वक्त नेता प्रतिपक्ष ग्राम बनेठा पहुंचे, यहां पर स्थित एक खदान से भारी मात्रा में रेत पोखलीन मशीनों के माध्यम से निकाली जा रही थी। जिसकी वीडियोग्राफी नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा करवाई गई। साथ ही ग्राम जनमासा और जैत और अन्य क्षेत्रों में भी नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह ने रेत और अन्य खनिज संपदाओं के परिवहन और उत्खनन को कैमरे में कैद करवाया है।
हले भी आया था दल
ऐसा नहीं है कि अवैध खनन की शिकायतों के मद्देनजर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के क्षेत्र में पहली बार दस्तक दी हो, इससे पहले भी कांग्रेसी विधायकों का एक दल मुख्यमंत्री  गृह क्षेत्र में हो रहे उत्खनन और  परिवहन को देखने आया था जिसकी एक विस्तृत रिपोर्ट और वीडियोग्राफी केन्द्र सरकार को भेजी गई थी।