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बुधवार, 21 मार्च 2012

नीलाम होगी शुगर फैक्ट्री

  अमित कुईया
सीहोर। पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली के कारण बंद पड़ी बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज कर्ज के चलते कभी भी नीलाम हो सकती है। प्रशासन के अधिकारियों ने फैक्ट्री पर बकाया विभिन्न विभागों की करोड़ों रुपए की राशि की रिकवरी के लिए कड़ा कदम उठाया है और बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज को कर्ज चुकाने के लिए एक नोटिस भेजा गया है साथ ही फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर एक नोटिस चस्पा किया गया है।
गौरतलब है कि बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले कई सालों से आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए बंद हो गई थी। लेकिन जिस वक्त फैक्ट्री का संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को आधा दर्जन से अधिक विभिन्न विभागों को विभिन्न मदों में राशि अदा करना थी जो कि फैक्ट्री प्रबंधन फैक्ट्री बंद होने के सालों बाद भी नहीं चुका पाया है।
प्रशासन ने उठाया कदम
पिछले दिनों सीहोर जिला प्रशासन ने फैक्ट्री की चार हजार एकड़ से अधिक भूमि को सीलिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित कर लिया था जिसके बाद प्रशासन ने एक ओर कदम उठाते हुए अब फैक्ट्री में विभिन्न विभागों की बकाया राशि की वसूली के लिए फैक्ट्री प्रबंधन पर पिछले सोलह  मार्च को एक नोटिस (मांग पत्र) भेजा है साथ ही बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज के मुख्य द्वार पर प्रशासन ने बकाया राशि की वसूली के लिए एक नोटिस भी चस्पा किया है जिसमें नियत समय में कंपनी की देनदारी चुकाने के निर्देश उल्लेखित है।
दर्जनों विभागों का बकाया
जिस वक्त बीएसआई शुगर इण्डस्ट्रीज का सुचारु संचालन होता था उस वक्त फैक्ट्री को अपनी जरुरतों के लिए विभिन्न विभागों से मदद की जरुरत पड़ती थी। जिसमें सूत्रों के मुताबिक गन्ना उत्पादन में सिंचाई के लिए पानी की जरुरत पड़ती थी जिसका करीब साढ़े सात लाख रुपए आज भी सिंचाई विभाग को कंपनी द्वारा दिया जाना है। इसी तरह विद्युत वितरण कंपनी का भी करीब 25 से 30 लाख रुपए बकाया है। इसी तरह नगर पालिका का समेकित कर, संपत्ति कर और जल कर का करीब एक करोड़ रुपए बकाया है। कंपनी को मंडी कमेटी और गन्ना विभाग का भी करीब 14 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया भुगतान करना है। यह सभी भुगतान वर्ष 1994 से 95 के समय के जब कंपनी का सुचारु संचालन होता था।
मजदूरों का बकाया 20 करोड़
बीएसआई शुगर इण्स्ट्रीज पर ताले लगने के बाद यहां कार्यरत हजारों मजदूरों का करीब बीस करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान प्रबंधन की लापरवाही के कारण नहीं हो सका है। इस बकाया भुगतान को लेकर मजदूर संगठन ने कोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन वर्ष 95-96 में मील प्रबंधन इस याचिका पर स्टे ले आया, लेकिन पंद्रह साल बाद एक बार फिर इस स्टे पर बेकेट मिल गया है जिसके बाद यह तय हो गया है कि मिल प्रबंधन को कंपनी में कार्यरत उन हजारों मजदूरों को पैसा किसी भी सूरत में देना होगा।
कंपनी होगी नीलाम
विश्वत प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि विगत सोलह मार्च को कंपनी पर विभिन्न विभागों और अन्य मदों की बकाया राशि की वसूली के लिए एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है। नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक पूरी प्रक्रिया हो जाने के बाद यदि मिल प्रबंधन बकाया राशि देने में न नूकूर करता है तो यह संभवत: यह तय है कि निकट समय में कंपनी के अधिकार क्षेत्र में सीलिंग मुक्त भूमि और शुगर फैक्ट्री की कुर्की कर नीलामी की राशि से यह बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
पहले भी चस्पा हुआ था नोटिस
बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन स्तर पर सन् 1995 में भी कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था लेकिन उस वक्त मिल प्रबंधन नोटिस के विरुद्ध स्टे ले आया जिसके ठीक पंद्रह साल बाद प्रशासन पुन: इस मामले में आगे बढ़ा है और अब कंपनी को एक बार फिर नोटिस जारी करते हुए बकाया भुगतान राशि देने के लिए चेताया गया है।
इनका कहना है
विभिन्न विभागों की सालों से लंबित बकाया राशि के भुगतान के लिए मिल प्रबंधन को एक मांग पत्र (नोटिस) जारी किया गया है।
अल्का एक्का, तहसीलदार सीहोर

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

सिहोर में दुसरे दिन भी जमकर बरसा रंग


सिहोर में बरसो पुराणी परंपरा के चलते आज शुक्रवार को भी जमकर होली खेली गई !बताया जाता है सिहोर में नवाबी शाशन काल क्र दौरान भोपाल नवाब होली पर्व के दुसरे दिन होली खेलने सिहोर आया करते थे तभी से यह परम्परा ईहोरे में चली आ रही है !हलाकि नवाबी शाशनकाल और नवाब तो चले गए चले गए लेकिन उनके द्वारा डाली गई यह परम्परा आज भी सिहोर में चली आ रही है और दुसरे दिन भी जमकर रंग गुलाल उड़ाया जा रहा है

अब खनिज माफियाओं के होंगे हौंसले बुलंद

-मुख्यमंत्री के गृह जिले में खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसने वाले अधिकारी का हुआ था तबादला, मुरैना की घटना के बाद सहमे जिले के अधिकारी
अमित कुइया 
सीहोर। इतिहास के पन्नों में अब तक की सबसे बड़ी खनिज कार्रवाही जिला प्रशासन द्वार बीते कुछ माह पूर्व में दर्ज की गई थी। लेकिन समय के साथ यह कार्रवाही भी खत्म हो गई। अब हालात यह है कि दबंग अधिकारी को दबंग खनिज माफियाओं ने सरकार की चाबूक दिखाकर खामोश कर दिया। और कार्रवाही में जिन खनिज माफियाओं पर जुर्माने लगाए गए वह भी एक बार फिर प्रशासन को न्यायालय में खड़ा करने  की धमकी दे रहे है। यही वजह है कि प्रशासन ने कार्रवाही करते हुए कागजों में जुर्माने की नसीहत तो दे दी लेकिन अब तक इस मामले में एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार जिले में एक बार फिर खनिज माफियाओं का बोलबाला नजर आ रहा है। बीते कुछ माह पूर्व जिला प्रशासन द्वारा एक दबंग अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए तैनात किया गया था और इस अधिकारी ने लगभग छ: अरब रुपए से अधिक के अवैध खनन को पकड़ा था। वहीं सौ से अधिक खनिज माफियाओं की फहरिस्त बनाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसके बाद प्रशासन ने सभी खनिज माफियाओं पर करोड़ों रुपए के जुर्माने लगाए लेकिन प्रशासन अब तक एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं कर सका है जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के आगे प्रशासन का चाबूक छोटा पड़ गया है।
तबादले के फेर में अधिकारी
खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए आईएएस अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं की चाबूक के आगे झुकना पड़ा और उनका तबादला कर दिया गया। लेकिन न्यायालय में अधिकारी ने न्याय मांगा और पुन: स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह तय हो गया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में प्रशासन पर खनिज माफियाराज हावी है।
छ: अरब का अवैध उत्खनन
प्रदेश में कितना अवैध उत्खनन हुआ है कि इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रशासनिक कार्रवाही के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में छ: अरब रुपए का अवैध उत्खनन पाया गया। वहीं कागजी कार्रवाही के बाद यह उत्खनन जारी है। जिससे स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध उत्खनन कहां तक पहुंच चुका है।
सहमे अधिकारी
अवैध उत्खनन कर परिवहन हो रहे खनिज को रोकने जा रहे प्रदेश के मुरैना जिले के एक क्षेत्र में आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार की हत्या के बाद जब सीहोर जिले के उन अधिकारियों से बात की जिन्होंने अवैध उत्खननकर्ताओं पर अंकुश लगाने की कार्रवाही की थी तो वह सहमे सहमे से नजर आए साथ ही उन्होंने अपनी दबी जुबान में स्वीकार किया कि हम शासन से रसूख रखने वाले अवैध उत्खननकर्ताओं के सामने वाकई बोने हंै। वहीं संयुक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा से भी प्रतिक्रिया चाही तो वह कुछ भी कहने से बचते रहे और उन्होंने पूर्व में की गई  कार्यवाही की जानकारी देने से मना कर दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के सामने प्रशासन के आला अधिकारी भी कितने डरे सहमे नजर आ रहे हैं।

गुरुवार, 8 मार्च 2012

आखिर कहां गायब हुई एक हजार जमीन

अमित कुईया
सीहोर। बीते दिनों भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की लगभग चार हजार एकड़ भूमि प्रशासन ने अपने अधीन कर ली है, लेकिन प्रशासन अब अपने ही पैतरे में फंस गया है।  क्योंकि 4 हजार 597 एकड़ अधिग्रहण हुई जमीन में फैक्ट्री के विभिन्न क्षेत्रों में फैली एक हजार एकड़ जमीन लापता है। जो कि प्रशासन को ढूंढने में पसीना आ रहा है।
जानकारी के अनुसार विगत दिनों अनुविभागीय न्यायालय राजस्व के एक निर्णय के बाद भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की करीब 4 हजार 597 एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट 1960 के तहत अधिग्रहित की गई थी। इस पूरे रकबे के खसरे नंबर आदि का मिलान का काम युद्ध स्तर पर प्रशासनिक अमला कर रहा है लेकिन एक मामले में अब प्रशासन को पसीना आ रहा है। क्योंकि प्रशासन ने कागजों में तो भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की भूमि अपने अधीन तो कर ली लेकिन प्रशासन इस पूरी भूमि को अब तक अपने कब्जे में नहीं ले पाया है। वहीं इस पूरी भूमि में से लगभग एक हजार एकड़ जमीन ऐसी है जो कि प्रशासन के सर्वे के दौरान लापता है।
कहां-कहां गायब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की कुल भूमि में से एक हजार एकड़ का रकबा मौके पर तो है लेकिन प्रशासन के सर्वे के दौरान क्षेत्र के सैकड़ाखेड़ी, बडिय़ाखेड़ी, कस्बा और शेखपुरा क्षेत्र में स्थित शुगर फैक्ट्री की यह जमीन नहीं मिल पा रही है।
अदला बदली वाले परेशान
वर्ष 1934 में प्रारंभ हुई भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज के पास तत्कालिक समय में पांच हजार से अधिक एकड़ का रकबा मौजूद था। इस अंतराल में फेक्ट्री संचालक और स्थानीय लोगों के संबंध इतने गहरे हो गए थे कि स्थानीय कुछ लोगों ने आसपास के गांव की अपनी भूमि बीएसआई कंपनी के नाम कर दी तथा इसके बदले में फेक्ट्री की शहर से लगी बेशकीमती जमीन अपने नाम करा ली। लेकिन प्रशासन द्वारा अब जब अधिग्रहण की कार्रवाई की गई तो इन जमीनों पर वर्षों से कब्जा जमाए उन लोगों में हड़कंप मच गया है साथ ही उन लोगों को यह डर सताने लगा है कि इन जमीनों पर वर्षों से काबिज उनका मालिकाना हक कहीं छीन न जाए। जिसके चलते वह सुबह से शाम तक तहसील कार्यालय में डेरा जमाए हुए हैं।

रविवार, 4 मार्च 2012

ड़क हादसों में दो घायल


सीहोर।  जिले के थाना आष्टा एंव इछावर थाना के अन्तर्गत हुए सड़क हादसों में दो लोग घायल हो गए। पुलिस ने सभी मामले कायम कर लिये। जानकारी के अनुसार आष्टा थाना अन्तर्गत ग्राम कोठरी के पास आज सुबह बाइक क्रमांक एमपी-37-एमजी-3222 के चालक ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति से चलाते हुए अजय को पीछे से टक्कर मारकर घायल कर दिया। इधर इछावर अन्तर्गत मोहनपुर लेड़ी के पास 13 फरवरी को बाइक के चालक ने अपने वाहन को अनियंत्रित गति से चलाते हुए पठारिया बॉका निवासी असरफ आ. कालेखां को टक्कर मारकर घायल कर दिया। वाहन चालकों द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाये जा रहे जिससे दुर्घटनायें बढ़ रही हैं।

हरे वृक्ष का रहे विशेष ध्यान: राय

सीहोर। कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी और पूर्व नपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल के जिला मुय संगठक राकेश राय ने कहा है कि सभी लोग होली का पर्व परंपरागत रुप से मनाएं। पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए श्री राय ने कहा है कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि होली पर्व पर हरे वृक्ष न काटे जाएं और इस पर्व को उत्साह ओर उमंग के साथ मनाया जाए, जिससे आपसी भाईचारा अधिक से अधिक बढ़े।
उल्लेखनीय है कि जिले में कांग्रेस सेवादल के माध्यम से लगभग दस सालों से जल बचाओ जन चेतना अाियान चलाने वाले कांग्रेस नेता राकेश राय लगातार इस बात के प्रयास करते रहें हैं कि पानी अनमोल होता है, उसे बचाने के लिए अधिक से अधिक जागरुकता बढ़े। दस साल पहले जब श्री राय ने यह अभियान शुरु किया था, तब से लेकर आज तक पानी के महत्व को लोगों को बताने के साथ जागरुकता लाने के प्रयास करने वाले श्री राय जिले के एक मात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी इस मुहिम को लगातार न केवल सराहना मिली, बल्कि लोगों ने उनकी बात को स्वेच्छा से स्वीकार भी किया।
पूर्व नपाध्यक्ष सीहोर राकेश राय ने कहा है कि होली पर्व पर रसायन वाले रंगों का उपयोग नहीं होना चाहिए। यह पर्व सभी को अ'छे मार्ग पर चलने का संदेश देता है।

नर्माण कार्यों का निरीक्षण

नगर पालिका प्रेसीडेंट नरेश मेवाडा निर्माण कार्यो का निरिक्षण करते हुए