-मुख्यमंत्री के गृह जिले में खनिज माफियाओं पर शिकंजा कसने वाले अधिकारी का हुआ था तबादला, मुरैना की घटना के बाद सहमे जिले के अधिकारी
अमित कुइया
सीहोर। इतिहास के पन्नों में अब तक की सबसे बड़ी खनिज कार्रवाही जिला प्रशासन द्वार बीते कुछ माह पूर्व में दर्ज की गई थी। लेकिन समय के साथ यह कार्रवाही भी खत्म हो गई। अब हालात यह है कि दबंग अधिकारी को दबंग खनिज माफियाओं ने सरकार की चाबूक दिखाकर खामोश कर दिया। और कार्रवाही में जिन खनिज माफियाओं पर जुर्माने लगाए गए वह भी एक बार फिर प्रशासन को न्यायालय में खड़ा करने की धमकी दे रहे है। यही वजह है कि प्रशासन ने कार्रवाही करते हुए कागजों में जुर्माने की नसीहत तो दे दी लेकिन अब तक इस मामले में एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार जिले में एक बार फिर खनिज माफियाओं का बोलबाला नजर आ रहा है। बीते कुछ माह पूर्व जिला प्रशासन द्वारा एक दबंग अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए तैनात किया गया था और इस अधिकारी ने लगभग छ: अरब रुपए से अधिक के अवैध खनन को पकड़ा था। वहीं सौ से अधिक खनिज माफियाओं की फहरिस्त बनाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसके बाद प्रशासन ने सभी खनिज माफियाओं पर करोड़ों रुपए के जुर्माने लगाए लेकिन प्रशासन अब तक एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं कर सका है जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के आगे प्रशासन का चाबूक छोटा पड़ गया है।
तबादले के फेर में अधिकारी
खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए आईएएस अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं की चाबूक के आगे झुकना पड़ा और उनका तबादला कर दिया गया। लेकिन न्यायालय में अधिकारी ने न्याय मांगा और पुन: स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह तय हो गया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में प्रशासन पर खनिज माफियाराज हावी है।
छ: अरब का अवैध उत्खनन
प्रदेश में कितना अवैध उत्खनन हुआ है कि इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रशासनिक कार्रवाही के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में छ: अरब रुपए का अवैध उत्खनन पाया गया। वहीं कागजी कार्रवाही के बाद यह उत्खनन जारी है। जिससे स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध उत्खनन कहां तक पहुंच चुका है।
सहमे अधिकारी
अवैध उत्खनन कर परिवहन हो रहे खनिज को रोकने जा रहे प्रदेश के मुरैना जिले के एक क्षेत्र में आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार की हत्या के बाद जब सीहोर जिले के उन अधिकारियों से बात की जिन्होंने अवैध उत्खननकर्ताओं पर अंकुश लगाने की कार्रवाही की थी तो वह सहमे सहमे से नजर आए साथ ही उन्होंने अपनी दबी जुबान में स्वीकार किया कि हम शासन से रसूख रखने वाले अवैध उत्खननकर्ताओं के सामने वाकई बोने हंै। वहीं संयुक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा से भी प्रतिक्रिया चाही तो वह कुछ भी कहने से बचते रहे और उन्होंने पूर्व में की गई कार्यवाही की जानकारी देने से मना कर दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के सामने प्रशासन के आला अधिकारी भी कितने डरे सहमे नजर आ रहे हैं।
अमित कुइया
सीहोर। इतिहास के पन्नों में अब तक की सबसे बड़ी खनिज कार्रवाही जिला प्रशासन द्वार बीते कुछ माह पूर्व में दर्ज की गई थी। लेकिन समय के साथ यह कार्रवाही भी खत्म हो गई। अब हालात यह है कि दबंग अधिकारी को दबंग खनिज माफियाओं ने सरकार की चाबूक दिखाकर खामोश कर दिया। और कार्रवाही में जिन खनिज माफियाओं पर जुर्माने लगाए गए वह भी एक बार फिर प्रशासन को न्यायालय में खड़ा करने की धमकी दे रहे है। यही वजह है कि प्रशासन ने कार्रवाही करते हुए कागजों में जुर्माने की नसीहत तो दे दी लेकिन अब तक इस मामले में एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार जिले में एक बार फिर खनिज माफियाओं का बोलबाला नजर आ रहा है। बीते कुछ माह पूर्व जिला प्रशासन द्वारा एक दबंग अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए तैनात किया गया था और इस अधिकारी ने लगभग छ: अरब रुपए से अधिक के अवैध खनन को पकड़ा था। वहीं सौ से अधिक खनिज माफियाओं की फहरिस्त बनाकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसके बाद प्रशासन ने सभी खनिज माफियाओं पर करोड़ों रुपए के जुर्माने लगाए लेकिन प्रशासन अब तक एक भी खनिज माफिया से वसूली नहीं कर सका है जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के आगे प्रशासन का चाबूक छोटा पड़ गया है।
तबादले के फेर में अधिकारी
खनिज माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए आईएएस अधिकारी गिरीश शर्मा को खनिज माफियाओं की चाबूक के आगे झुकना पड़ा और उनका तबादला कर दिया गया। लेकिन न्यायालय में अधिकारी ने न्याय मांगा और पुन: स्थानांतरण पर रोक लगा दी गई। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह तय हो गया कि मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर में प्रशासन पर खनिज माफियाराज हावी है।
छ: अरब का अवैध उत्खनन
प्रदेश में कितना अवैध उत्खनन हुआ है कि इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रशासनिक कार्रवाही के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में छ: अरब रुपए का अवैध उत्खनन पाया गया। वहीं कागजी कार्रवाही के बाद यह उत्खनन जारी है। जिससे स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध उत्खनन कहां तक पहुंच चुका है।
सहमे अधिकारी
अवैध उत्खनन कर परिवहन हो रहे खनिज को रोकने जा रहे प्रदेश के मुरैना जिले के एक क्षेत्र में आईपीएस अधिकारी नरेन्द्र कुमार की हत्या के बाद जब सीहोर जिले के उन अधिकारियों से बात की जिन्होंने अवैध उत्खननकर्ताओं पर अंकुश लगाने की कार्रवाही की थी तो वह सहमे सहमे से नजर आए साथ ही उन्होंने अपनी दबी जुबान में स्वीकार किया कि हम शासन से रसूख रखने वाले अवैध उत्खननकर्ताओं के सामने वाकई बोने हंै। वहीं संयुक्त कलेक्टर गिरीश शर्मा से भी प्रतिक्रिया चाही तो वह कुछ भी कहने से बचते रहे और उन्होंने पूर्व में की गई कार्यवाही की जानकारी देने से मना कर दिया। जिससे साफ जाहिर होता है कि खनिज माफियाओं के सामने प्रशासन के आला अधिकारी भी कितने डरे सहमे नजर आ रहे हैं।

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