अमित कुईया
सीहोर। बीते दिनों भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की लगभग चार हजार एकड़ भूमि प्रशासन ने अपने अधीन कर ली है, लेकिन प्रशासन अब अपने ही पैतरे में फंस गया है। क्योंकि 4 हजार 597 एकड़ अधिग्रहण हुई जमीन में फैक्ट्री के विभिन्न क्षेत्रों में फैली एक हजार एकड़ जमीन लापता है। जो कि प्रशासन को ढूंढने में पसीना आ रहा है।
जानकारी के अनुसार विगत दिनों अनुविभागीय न्यायालय राजस्व के एक निर्णय के बाद भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की करीब 4 हजार 597 एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट 1960 के तहत अधिग्रहित की गई थी। इस पूरे रकबे के खसरे नंबर आदि का मिलान का काम युद्ध स्तर पर प्रशासनिक अमला कर रहा है लेकिन एक मामले में अब प्रशासन को पसीना आ रहा है। क्योंकि प्रशासन ने कागजों में तो भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की भूमि अपने अधीन तो कर ली लेकिन प्रशासन इस पूरी भूमि को अब तक अपने कब्जे में नहीं ले पाया है। वहीं इस पूरी भूमि में से लगभग एक हजार एकड़ जमीन ऐसी है जो कि प्रशासन के सर्वे के दौरान लापता है।
कहां-कहां गायब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की कुल भूमि में से एक हजार एकड़ का रकबा मौके पर तो है लेकिन प्रशासन के सर्वे के दौरान क्षेत्र के सैकड़ाखेड़ी, बडिय़ाखेड़ी, कस्बा और शेखपुरा क्षेत्र में स्थित शुगर फैक्ट्री की यह जमीन नहीं मिल पा रही है।
अदला बदली वाले परेशान
वर्ष 1934 में प्रारंभ हुई भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज के पास तत्कालिक समय में पांच हजार से अधिक एकड़ का रकबा मौजूद था। इस अंतराल में फेक्ट्री संचालक और स्थानीय लोगों के संबंध इतने गहरे हो गए थे कि स्थानीय कुछ लोगों ने आसपास के गांव की अपनी भूमि बीएसआई कंपनी के नाम कर दी तथा इसके बदले में फेक्ट्री की शहर से लगी बेशकीमती जमीन अपने नाम करा ली। लेकिन प्रशासन द्वारा अब जब अधिग्रहण की कार्रवाई की गई तो इन जमीनों पर वर्षों से कब्जा जमाए उन लोगों में हड़कंप मच गया है साथ ही उन लोगों को यह डर सताने लगा है कि इन जमीनों पर वर्षों से काबिज उनका मालिकाना हक कहीं छीन न जाए। जिसके चलते वह सुबह से शाम तक तहसील कार्यालय में डेरा जमाए हुए हैं।
सीहोर। बीते दिनों भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की लगभग चार हजार एकड़ भूमि प्रशासन ने अपने अधीन कर ली है, लेकिन प्रशासन अब अपने ही पैतरे में फंस गया है। क्योंकि 4 हजार 597 एकड़ अधिग्रहण हुई जमीन में फैक्ट्री के विभिन्न क्षेत्रों में फैली एक हजार एकड़ जमीन लापता है। जो कि प्रशासन को ढूंढने में पसीना आ रहा है।
जानकारी के अनुसार विगत दिनों अनुविभागीय न्यायालय राजस्व के एक निर्णय के बाद भोपाल शुगर इंडस्ट्रीज की करीब 4 हजार 597 एकड़ जमीन सीलिंग एक्ट 1960 के तहत अधिग्रहित की गई थी। इस पूरे रकबे के खसरे नंबर आदि का मिलान का काम युद्ध स्तर पर प्रशासनिक अमला कर रहा है लेकिन एक मामले में अब प्रशासन को पसीना आ रहा है। क्योंकि प्रशासन ने कागजों में तो भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की भूमि अपने अधीन तो कर ली लेकिन प्रशासन इस पूरी भूमि को अब तक अपने कब्जे में नहीं ले पाया है। वहीं इस पूरी भूमि में से लगभग एक हजार एकड़ जमीन ऐसी है जो कि प्रशासन के सर्वे के दौरान लापता है।
कहां-कहां गायब
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज की कुल भूमि में से एक हजार एकड़ का रकबा मौके पर तो है लेकिन प्रशासन के सर्वे के दौरान क्षेत्र के सैकड़ाखेड़ी, बडिय़ाखेड़ी, कस्बा और शेखपुरा क्षेत्र में स्थित शुगर फैक्ट्री की यह जमीन नहीं मिल पा रही है।
अदला बदली वाले परेशान
वर्ष 1934 में प्रारंभ हुई भोपाल शुगर इण्डस्ट्रीज के पास तत्कालिक समय में पांच हजार से अधिक एकड़ का रकबा मौजूद था। इस अंतराल में फेक्ट्री संचालक और स्थानीय लोगों के संबंध इतने गहरे हो गए थे कि स्थानीय कुछ लोगों ने आसपास के गांव की अपनी भूमि बीएसआई कंपनी के नाम कर दी तथा इसके बदले में फेक्ट्री की शहर से लगी बेशकीमती जमीन अपने नाम करा ली। लेकिन प्रशासन द्वारा अब जब अधिग्रहण की कार्रवाई की गई तो इन जमीनों पर वर्षों से कब्जा जमाए उन लोगों में हड़कंप मच गया है साथ ही उन लोगों को यह डर सताने लगा है कि इन जमीनों पर वर्षों से काबिज उनका मालिकाना हक कहीं छीन न जाए। जिसके चलते वह सुबह से शाम तक तहसील कार्यालय में डेरा जमाए हुए हैं।
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