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रविवार, 13 जनवरी 2013

                                                " मोहे  पडन  दो       बाबूल अभी न ब्याहो..".
               .............नाबलिग ने बालिका वधू बनने से किया इंकार

       अमित कुईया 

छात्रा प्रियंका छात्रावास सह अधीक्षक श्रीमती सुशीला चौरसिया के साथ 
सीहोर। बाबा! अभी मेरी पढऩे की उम्र है,अ भी मेरे हाथ पीले मत करो। यह मार्मिक गुहार लगा रही है ग्राम जमोनिया टैंक स्थित बालिका छात्रावास में रहकर कक्षा आठवीं की पढ़ाई करने वाली 13 वर्षीय ग्रामीण छात्रा प्रियंका मेवाड़ा, जिसके पिता उसे कम उम्र में ही बालिका वधु बनाने पर आमादा है।
    मामला जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जमोनिया टैंक में जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित शासकीय बालिका छात्रावास का है, जंहा  कक्षा आठवीं में पढने करने वाली ग्राम दुपाडिय़ा दांगी निवासी प्रियंका मेवाड़ा की शादी उसका पिता 13 साल की कच्ची उम्र में करने पर आमदा है लेकिन इसे प्रियंका का साहस ही कहेंगे की वह अपने पिता की इस जिद के आगे भी मजबूत खड़ी  रही और उसने अपने पिता की गैर क़ानूनी जिद की जानकारी  छात्रावास संचालको सहित जिम्मेदारो को बताई 
 मीडिया को बताई व्यथा 
ग्राम दुपाडिय़ा दांगी निवासी चांद सिंह की 13 वर्षीय पुत्री प्रियंका मेवाड़ा ग्राम जमोनिया टैंक के बालिका छात्रावास में रहकर कक्षा आठवीं की पढ़ाई कर रही है।  रविवार को छात्रावास पहुंचे इस संवाददाता को अपनी व्यथा सुनाते हुए निडर छात्रा प्रियंका ने बताया कि उसके पिता चांद सिंह मेवाड़ा 13 वर्ष की उम्र में ही उसके हाथ पीले करना चाह रहे हैं, जबकि वह अभी शादी न करते हुए आगे और पढ़ाई करने के सपने संजोए है।
छात्रावास की छत पर चढ़ी
मासूम मगर साहसी छात्रा प्रियंका ने बताया कि गत 8 जनवरी को उसके पिता चांदसिंह मेवाड़ा उसे लेने छात्रावास आए थे, लेकिन कम उम्र में अपनी शादी का विरोध कर रही प्रियंका उनसे बचने के लिए छात्रावास की तीसरी मंजिल पर जाकर छुप गई थी। उसे पता था कि अगर वह पिता के साथ घर चली गई तो वह उसकी शादी कराकर ही दम लेंगे, लेकिन   छात्रावास पहुंचा उसका पिता चांदसिंह उसे लेकर जाने की जिद पर अड़ा हुआ था और इस दौरान उसकी बहस छात्रावास की सह अधीक्षक श्रीमती सुशीला चौरसिया से भी बहस हो गई। आखिर उसने लिखित में आश्वासन दिया कि वह अपनी बड़ी पुत्री  प्रीति की विवाह रस्म के लिए प्रियंका को ले जा रहा है, तथा वह उसकी शादी नहीं करेगा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद छात्रावास प्रबंधन ने उसे पिता के साथ जाने दिया।
...........और करा दी लग्र
लिखित आश्वासन देने के बाद भी चांदसिंह मेवाड़ा अपनी पुत्री प्रियंका को गांव ले गया और बकौल प्रिंयका के उसकी भी बहन के साथ लग्र की रस्म अदा कर दी।  इसके बाद 11 जनवरी को प्रिंयका का फुफा अशोक उसे वापस छात्रावास में छोड़ गया। छात्रावास पहुंचकर प्रियंका ने सारा वाक्या छात्रावास की सह अधीक्षिका श्रीमती सुशीला चौरसिया को बताया। इस पर श्रीमती चौरसिया ने जिला शिक्षा केन्द्र समन्वयक अशोक पराड़कर को पूरे वाक्ये से अवगत कराया। इस दौरान छात्रा ने भी लिखकर दिया कि वह अभी शादी नहीं करना चाहती है।
23 को होना है शादी
प्रियंका मेवाड़ा ने बताया कि उसके पिता ने ग्राम छतरी निवासी एक युवक से शादी तय कर दी है और आगामी 23 जनवरी को उसके पिता उसकी शादी करा देंगे।  इस मामले को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने में छात्रावास की सह अधीक्षिका श्रीमती सुशीला चौरसिया एवं गांव की जागरूक सरपंच श्रीमती गीता राठौर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इनका कहना है
छात्रावास की सह अधीक्षिका ने मुझे इस बारे में बताया था तो मैंने बालिका के पिता चांदसिंह मेवाड़ा को बुलाकर उसे समझाईश दी है और उसने लिखित में आश्वासन भी दिया है कि वह अपनी नाबालिग पुत्री प्रियंका की शादी नहीं करेगा। इसके बाद भी अगर वह प्रियंका की शादी करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज कराया जाएगा।
अशोक पराड़कर
डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र

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