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शनिवार, 14 जुलाई 2012

अमित कुईया 
कालसर्प और नागपंचमी का योग बहुत ही दुर्लभ होता है और बहुत खास भी। वैसे तो ये योग कभी-कभी कुछ सालों में बन जाता है। जैसे 2008 में बना था लेकिन नीच राशि में स्थित राहु-केतु के साथ बनने वाला कालसर्प योग व नाग पंचमी का संयोग 93 साल बाद बन रहा है ये विशेष दुर्लभ योग बड़ा असर देने वाला रहेगा। इससे पहले नीच राशि का ये कालसर्प योग 10 जुलाई 1919 को बना था लेकिन तब भी ये योग शनिवार को नहीं बना।

ये घटना बहुत ही दुर्लभ है। पिछले 100 से अधिक सालों में ऐसा देखने में नहीं आया कि शनिवार को शुरू होने वाले कालसर्प योग जिसमें राहु-केतु अपनी नीच राशि में रहेंगे और इसी कालसर्प में नागपंचमी का पर्व आ रहा है।

राहु और केतु के कारण कालसर्प योग बनता है। राहु और केतु शनि के दोनों हाथ हैं। शनि किसी को कर्मो का फल देता है तो राहु और केतु के द्वारा ही देता है। शनिवार को ही राहु और केतु के कालसर्प योग बनने और इस कालसर्प योग में नागपंचमी का पर्व आने के कारण ये घटना बहुत बड़ी और असरदार रहेगी।

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