| निर्दोष युवक कोसंगीन आरोपी की तरह पोलिसे वहन में ले जाती पोलिसे |
सीहोर। देश भक्ती और जनसेवा की कसम खाने वाली पुलिस अब रक्षक नहीं भक्षक बन गई है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया जिसमें रक्षित निरीक्षकपुलिस पंकज परमार ने चालानी कार्यवाही के दौरान एक दो पहिया वाहन चाल·कको वर्दी क रौब दिखाते हुए ना केवल उसका मोबाईल फेंका बल्क की उस निर्दोश युवक के बाल पक ·ड़क र उसे पुलिसिया वाहन में ऐसे पटक दिया मानों जैसे वह युवका संगीन आरोपी हो।
गौरतलब है की अक्सर कुभ कारणीय नींद में सोने वाला पुलिस अमला गाहे-बजाहे जागता है और महिने में एकबार जागकार मनचाही कार्यवाही को अंजाम देकार वापस गायब हो जाता है। शनिवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। यातायात पुलिस रक्षित निरीक्षक अकशल नेतृत्व में सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर वाहन के कागज देखने की बजाय वर्दी का रोब झाडऩे में ज्यादा नजर आ रहा था। इधर अनन्त चतुर्दशी की तैयारियों और झांकीयों को अंतिम रुप देने में लगे युवक रात-रात भर मेहनतकर तैयारी में लगे हैं इसी क्रम में बड़ा बाजार निवासी मोनू शर्मा भी गणेश उत्सव की झांकी के संबंध में आवश्यक कार्य निपटा कर सीहोर की तरफ आ रहा था के तभी रक्षित निरीक्ष· पंकज परमार ने उक्त युवक को रोकऔर उससे गाड़ी के कागजात दिखाने की बात कही। मोनू शर्मा ने तत्काल वाहन रोककर पुलिस से कहा की वाहनके कागज घर पर रखे हैं में लाकर दिखा दूंगा। लेकीन वहां मौजूद आरआई पंकज परमार ने उनकी एक न सुनी और पुलिसिया अंदाज में बिन सिर पैर की बात शुरू कर दी और युवक मोनू शर्मा के साथ बेमतलबकी बातें ·रना शुरू ·र दिया। बात यही खत्म नहीं हुई आरआई पं·ज परमार ने अपना पुलिसिया रौब झाड़ते हुए उक्त युव· ·ा मोबाईल भी झड़प ·र सड़· पर फें· दिया। अब दिखाता हूं तुझे समझकर पुलिस के नौसीखिये अधि·ारी पं·ज परमार ने सीधे युव· ·े बाल पकड़कर उसे जलीलकरते हुए एक तरफ फेंक दिया और कहा की अब दिखाता हूं तुझे वर्दी का रौब। इससे पहले ही युवक कुछ समझ पाता तभी आरआई पंकज परमार ने उसकी कालर पकड़कर उसे फिर कहा की अब कोई चालान नहीं वाहन जप्त होगा। जब युवक ने कहा की साहब ऐसा मत करो हमें बहुत काम है, झांकी बनाना है, आप चालान काट लो तब तक तो नौसीखिये पुलिस अधिकारी पंकज परमार ने ऐसा नाटक शुरु कीया की जैसे यहाँ कोई बड़ा आतंकी उन्होने पक·ड़ लिया है, सीधे युवक को उन्होने कालर प·कडी घसीटते हुए अपने पुलिस वाहन में उठाकर लगभग फेंकते हुए बैठा दिया। पुलिस की यह असंवेदनशील हरकट ने युवककीआंखो में आंसू ला दिये। उसकेसाथ पुलिस का यह तरीका कुछ ऐसा था जैसे वह कोई आदतन बड़ा अपराधी हो और पुलिस उसे वर्षों से ढूंढ रही हो। इसके बाद पुलिस युवीके लाख कहने पर और चालान काटने की गुजारिश करने के बावजूद उसे कोतवाली ले गई। जहां एसडीओपी शर्मिंदा हो गयेलेकिन कुछ बोले नहीं। कोतवाली में जैसे ही पुलिस केयह नौसीखिये अधिकारी युबक लेकर पहुँचे तो तब अनन्त चतुर्दशी की तैयारी कररहे युवको ने कोतवाली पुलिस को उक्त जान·ारी दे दी थी और एसडीओपी ·ो भी बताया था ·ि साहब आप·ी पुलिस ऐसा ·र रही है। जब निरपराध युव· मोनू शर्मा ·ो पुलिस वाहन में बैठा·र आदतन अपराधी ·ी तरह ·ोतवाली लाई तो यहां एसडीओपी ने मामला पूछा। उन्होंने नौसीखिये अधि·ारी ·ी बात सुनी और युव· ·ी बात भी सुनी। एसडीओपी ने अंतत: युव· ·ो छोड़ देने ·ी बात ·ही। और पुलिस ने यहां चालान ·ाट·र युव· ·ो छोड़ दिया। जब·ि यह ·ाम मौ·े पर भी हो स·ता था।
एसपी ·े निर्देश हवा में
इस संबंध में एसपी ·ेडी पाराशर ·ो जान·ारी मोबाईल फोन पर दे दी गई थी आरआई पं·ज परमार ·े इस ·ार्य व्यवहार ·ीबात भी बताई गई थी ले·िन एसपी ·े निर्देश मोबाईल पर आने ·े बाद भी आरआई पं·ज परमार अपनी दबंगई पर अड़े रहे और उन्होंने एसपी ·े आदेशों ·ो भी मानना उचित नहीं समझा। अंतत: यह मामला ·ोतवाली त· पहुंचा गया।
अपराधी ·ौन?
शनिवार ·ो जिस तरह से पुलिस ·े नौसीखिये अधि·ारी सड़· पर जनता ·े सामने खड़े हो·र हर·तें ·र रहे थे उससे स्पष्ट लग रहा था ·ि आखिर अपराधी जनता है या पुलिस । आम जनता ·े साथ अचान· प्र·ट हुई पुलिस ऐसे पेश आ रही थी मानो ·ोई शोले फिल्म ·े गब्बर सिंह ·ा राज चल रहा हो जहां बोलना भी गुनाह और ना बोलना भी अपराध। आम जनता ·े साथ मारपीट, बाल प·ड़·र जलील ·रना ऐसा लग रहा था ·ि सीहोर में भी वर्दीवाले गुंडे आ गये हो।
अनन्त चतुर्दशी से दूर रखें
उक्त घटना ·े बाद से ही नगर ·ी गणेश उत्सव व झां·ी उत्सव समितियों में खासा रोष था। समितियों ·े प्रमुखों ने पुलिस ·े आला अधि·ारियों से यह अपील ·ी है ·ि ऐसे अडिय़ल पुलिस अधि·ारियों ·ो चतुर्दर्शी चल समारोह व्यवस्था से अलग ही रखा जाए वरना इन·ी हर·तों से शहर में माहौल बिगड़ स·ता है और आमजनों ·ा पुलिस से भरोसा उठ जाएगा।
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