सीहोर। खरीददारी का महापर्व धनतेरस इस बार दो दिन मनाया जाजएगा दोनों ही दिन खरीदी के लिए उत्तर योग है। ऐसा संयोग नौ साल बाद मना है जिसके चलते 24 एवं 25 अक्टूबर को धनतेरस का पर्व रहेगा।
उल्लेखनीय है कि दीप उत्सव का शुभारंभ धनतेरस से ही माना जाता है। धनतेरस को दीपदान करने एवं भगवान धनवंतरी मनाने की परम्परा है लेकिन इस बार गृह नक्षत्रों की चाल कुछ इस प्रकार बनी है कि धनतेरस पर्व दो दिन का होगा। ज्योतिषों का मानना है कि 24 अक्टूबर को धनतेरस के निर्मित दीपदान किया जाएगा जबकि 25 अक्टूबर को धनतेरस और रूप चौदस मनाई जाएगी। यह दोनों ही दिन खरीददारी के लिए श्रेष्ठ माने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि दीप उत्सव का शुभारंभ धनतेरस से ही माना जाता है। धनतेरस को दीपदान करने एवं भगवान धनवंतरी मनाने की परम्परा है लेकिन इस बार गृह नक्षत्रों की चाल कुछ इस प्रकार बनी है कि धनतेरस पर्व दो दिन का होगा। ज्योतिषों का मानना है कि 24 अक्टूबर को धनतेरस के निर्मित दीपदान किया जाएगा जबकि 25 अक्टूबर को धनतेरस और रूप चौदस मनाई जाएगी। यह दोनों ही दिन खरीददारी के लिए श्रेष्ठ माने जा रहे हैं।
इस संबंध में अंक ज्योतिष पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि 24 अक्टूबर को सूर्य स्वाति नक्षत्र में जाएगा इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र भी रहेगा। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र 25 अक्टूबर को तड़के 3.44 बजे तक रहेगा जिसके बाद हस्त नक्षत्र शुरु होगा। शास्त्रों में उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में मांगलिक कार्य व खरीददारी करना श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने बताया कि 24 अक्टूबर को धनतेरस दोपहर 12.33 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 9.30 बजे तक रहेगा। दीपदान शाम को त्रयोदशी व प्रदोषकाल में किया जाता है और धनवंतरी जयंती उदीयात तिथि में त्रयोदशी होने पर मनाई जाती है इसलिए 24 अक्टूबर को शाम को त्रयोदशी होने पर दीपदान किया जाएगा और 25 अक्टूबर को सूर्य उदय होने के समय त्रयोदशी धनवंतरी जयंती मनाई जाएग। रूपचतुर्दशी भी 25 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।
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