@अमित कुईया
सीहोर। बाल अपराधियों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए शासन की मंशा थी कि प्रत्येक जिले में संप्रेक्षण गृह यानि बाल कल्याण जेल का निर्माण किया जाये, जिससे कि यह बाल अपराधी एक स्वच्छ माहौल में रहकर नया जीवन शुरू कर पिछले अपराधों से दूर हो सकें,लेकिन जमीं न मिलने के कारन शाशन की यह मंशा मुख्यालय पर दम तोडती दिख रही है !
बाल संप्रेक्षण गृह का निर्माण सीहोर जिला मुख्यालय पर भी होना था, जिसके लिए वर्ष 2009 में प्रशासकीय स्वीकृति भी शासन स्तर पर मिल गई और इस भवन के निर्माण के लिए उस वक्त करीब 20 लाख रूपये अनुमानित लागत आना थी लेकिन इसे दुर्भाग्य कहें या सरकारी कामकाजों की लेटलतीफी कि दो साल बीत जाने के बाद भी संप्रेक्षण गृह के लिए प्रशासन जमीन भी उपलब्ध नहीं करवा पाया है, तो जाहिर है कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना इसी तरह इधर से उधर झूलती रहेगी।
टेण्डर हुए काम नहींजमीन न मिलने के अभाव में बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा टेण्डर भी जारी किये गये थे और इस जेल के निर्माण के लिए भी ठेकेदार की नियुक्ति भी हो गई थी, लेकिन जमीन न मिलने के अभाव में शासन की मंशा मुख्यालय पर दम तोड़ती नजर आ रहीहै।
जमीन नहीं मिलने पर वापिस होगी राशि
इधर जहां एक ओर शासन की मंशानुरूप बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए ठोस प्रशासनिक पहल न होने के कारण जमीन आबंटन में लेट लतीफी बढ़ती गई वहीं गामीण यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का साफ तौर पर कहना हो गया है कि जल्द ही शासन स्तर पर इस गृह निर्माण के लिए आबंटित राशि वापस की जायेगी, जिसके लिए प्रस्ताव भी बना लिया गया है, यदि ऐसा हुआ तोसरकारी कर्मचारियों की लेटलतीफी के चलते शासन की यह योजना एक बार फिर दम तोड़ देगी।
20 लाख की लागत 35 लाख पर पहुंची
बाल संप्रेक्षण गृह के लिए वर्ष 2009 में प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद विभागीय तौर पर 20 लाख की लागत अनुमानित होना बताई गईथी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए लागत भी बढ़कर दुगुनी होकर करीब 35 लाख पहुंच गई है, और यदि इसी तरह समय बीतता रहा तो जहां इसकी लागत आने वाले दिनों में बढ़ती चली जायेगी वहीं जमीन के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना भी खटाई में पड़ जायेगी।
लिखे कई पत्र नतीजा सिफर
बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए जमीन न मिलने को लेकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के विभागीय अधिकारियों ने कई बार प्रशासनिक स्तर पर पत्र लिखे हैं लेकिन हर बार या तो यह पत्र रद्दी की टोकरी में डाल दिये जाते हैं या फिर निर्माण के लिए जमीन के आबंटन की यह फाईल सरकारी दरबारी कार्यालय में इधर से उधर झूलती रहती है।
अब तक 14 स्थान चिन्हित
बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए अब तक प्रशासनिक स्तर पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के विभागीय अधिकारियों को 1 दर्जन से ज्यादा स्थान उपलब्ध करवाये गये हंै लेकिन उक्त जेल के लिए हर बार किन्ही-न-किन्हीं कारणों से यह स्थान भी विभाग को रास नहीं आये हैं।
इनका कहना है
बाल संप्रेक्षण गृह निर्माण के लिए जमीन के आबंटन की बात सही है, जल्द ही बाल संप्रेक्षण गृह के लिए जमीन का आबंटन सुनिश्चित किया जायेगा।
डॉ.संजय गोयल, कलेक्टर सीहोर
जमीन न मिलने के कारण बाल संप्रेक्षण गृह के लिए आबंटित 30 लाख की राशि को वापिस करने का प्रस्ताव बना लिया गया है, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर जमीन आबंटित नहीं करवाई जा रही है।
अनिल शर्मा, उपयंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा
बाल संप्रेक्षण गृह के लिए वर्ष 2009 में प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद भी अब तक इस दिशा में जमीन आबंटन को लेकर कोई ठोस कार्यवाही नहीं कीगई है जिसके चलते शासन की महत्वाकांक्षी योजना का परिपालन मुख्यालय पर नहीं हो पा रहा है।
पुरषोत्तम कुईया, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
agnisehore@yahoo.co.in
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