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मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

शादी राजाराम की, खर्चा पूरे गांव का

आज तक आप लोगों ने न कभी सुना होगा, न कभी देखा होगा, लेकिन यह सच है कि इ छावर के निकट एक गांव में एक दूल्हे की शादी में पूरे गांव ने खर्चा उठाया। इछावर तहसील मुख्यालय से 10 कि.मी. दूर स्थित करीबन 800 की जनसंख्या वाले गांव कुशलपुरा के इतिहास में पहली बार ही ऐसी शादी हुई जहां दूल्हा सिर्फ एक है लेकिन शादी का खर्चा उठाने वाले पूरे ग्रामवासी।
   ीहोर। कुशलपुरा में एक संपन्न परिवार के मोहनलाल वर्मा के 22 वर्षीय पुत्र राजाराम खुरचनी की 18 वर्षीय भूरी वर्मा तहसील भोपाल के साथ विवाह के बंधन में बंधे।
क्यों थी अनोखी शादी
कुशलपुरा गांव के स्व.उमरावसिंह पडिय़ार की मृत्यु 80 वर्ष पहले हो गई थी जिसके बाद इस गांव में किसी के शरीर में देव महाराज नहीं आ रहे थे, जो कि गांव के लोगों की झाड़-फूंक कर सकें। 80 वर्षों बाद दूल्हा बने राजाराम के शरीर में भाईदूज के दिन देवसंवर देवमहाराज ने प्रवेश किया। उसके बाद पूरे गांव में नये पडिय़ार राजाराम की शादी करने की योजना बनाई और परंपरानुसार राजाराम की 26 नवम्बर को गणेश पूजन, माता पूजन से शादी की शुरूआत हुई और बीते 4 दिसम्बर को राजाराम ने सूरज की धूप में सात फेरे लिए।
धोती-कुर्ते में लिए फेरे
आमतौर पर विवाह बंधन में बंधने वाले दूल्हे कार्ट-पेंट पहने नजर आते हैं, लेकिन आधुनिक पौषाक से अलग हटकर दूल्हे राजाराम ने अपने ग्रामवासियों द्वारा खरीदे गये धोती-कुर्ते में फेरे लिए।
जश्न के माहौल में डूबा पूरा गांव
कुशलपुरा मे जो शादी हुई जो इससे पूरा गांव जश्न में डूबा हुआ था। इस संवाददाता को दुल्हे की बहिन बबीता वर्मा ने बताया कि हमने कभी नहीं सोचाा था कि भाई की शादी इतने अच्छे तरीके से होगी, वहीं इस अनूठे विवाह बंधन में बंधा दूल्हे राजाराम ने बताया कि पूरे गांव वालों के सहयोग से हुई शादी से वह बेहद खुश है, और मुझे ऐसा लगता है कि पूरे गांव का मैं इकलौता लड़का हॅूं।
कॉलेज की पढ़ाई कर रहे राजाराम कहते हैं उनका नौकरी करने का कोई मन नही है, वह अब गांव वालों की सेवा में ही काम करेंगे।

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