सोमवार को मेगा नसबंदी शिविर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आयोजित किया गया, जिसमें नसबंदी कराने वाली महिलाओं व उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए स्वास्थ्य केन्द्र प्रबंधन द्वारा किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था नही की गई थी। नतीजन महिलाएं बच्चोंं को लेकर कहीं फर्श पर तो कहीं बरामदें में जमीन पर ही बैठी रही।
लक्ष्य पूर्ति के लिए लगाये जा रहे है। इस नसबंदी शिविर में आने वाली महिलाओं के नशीब में टेंट हाऊस के गंदे व बदबूदार बिस्तर ही लिखे थे। उन्हीं पर महिलाओं को लाकर लैटाया जा रहा था।
महिलाओं ने बताया - दूर - दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आई आदिवासी महिला सावित्री बाई, जयंती बाई, फूलबती बाई, सुमन बाई ने बताया कि नसबंदी कराने के लिए अल सुबह से ही हमें अपने ग्रामों से यहां आना पड़ता है। अस्पताल में देर शाम तक आपॅरेशन प्रक्रिया आरंभ नही की जाती। रात्री में हमें ठंड में नीचे दहलान पर सोना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा टेेंट हाऊस से गादी व रजाई बुलवाये जरूर थे लेकिन टेंट हाऊस के बिस्तर बदबूदार एवं छोटे व फटे होने के कारण हमें सुकुढ़कर ब-मुश्किल रात गुजारनी पड़ी।
परिजन भी होते रहे परेशान
नसबंदी महिलाओं के साथ आए परिजन सुखराम, खुशीलाल उईके, पर्वत सिंह मरकाम आदि ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने हमें सर्व सुविधा की बात कहीं थी। यहां पर आने पर केवल हमारी महिलाओं जिनके ऑपरेशन हुए उन्हें बरामदे में ही टेंट हाऊस के बिस्तर दिए गए। हम लोगों ने प्रागंण में अग्रि जलाकर अपनी रात व्यतीत की।
इतना दिया लक्ष्य
नसरुल्लागंज स्वास्थ्य केन्द्र को 1950 नसबंदी ऑपरेशन आगामी 31 मार्च 2011 तक करना है। इसके पूर्व 272 ऑपेरशन किये जा चुके हैं। आज मैगा शिविर में 146 महिलाओं का पंजीयन किया गया, जिसमें 143 महिलाओं को नसबंदी ऑपेरशन भोपाल से आये डॉक्टर एस.सी.भार्गव द्वारा किया गया।
इनका कहना है
ऑपरेशन में आने वाली महिलाओं के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा सभी प्रकार व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती है। बिस्तरों की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। अगर किसी को कोई शिकायत थी तो उसे बताना चाहिए। समस्या का निराकरण कर दिया जाता।
डॉ. आरसी. विश्वकर्मा
लक्ष्य पूर्ति के लिए लगाये जा रहे है। इस नसबंदी शिविर में आने वाली महिलाओं के नशीब में टेंट हाऊस के गंदे व बदबूदार बिस्तर ही लिखे थे। उन्हीं पर महिलाओं को लाकर लैटाया जा रहा था।
महिलाओं ने बताया - दूर - दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आई आदिवासी महिला सावित्री बाई, जयंती बाई, फूलबती बाई, सुमन बाई ने बताया कि नसबंदी कराने के लिए अल सुबह से ही हमें अपने ग्रामों से यहां आना पड़ता है। अस्पताल में देर शाम तक आपॅरेशन प्रक्रिया आरंभ नही की जाती। रात्री में हमें ठंड में नीचे दहलान पर सोना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा टेेंट हाऊस से गादी व रजाई बुलवाये जरूर थे लेकिन टेंट हाऊस के बिस्तर बदबूदार एवं छोटे व फटे होने के कारण हमें सुकुढ़कर ब-मुश्किल रात गुजारनी पड़ी।
परिजन भी होते रहे परेशान
नसबंदी महिलाओं के साथ आए परिजन सुखराम, खुशीलाल उईके, पर्वत सिंह मरकाम आदि ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने हमें सर्व सुविधा की बात कहीं थी। यहां पर आने पर केवल हमारी महिलाओं जिनके ऑपरेशन हुए उन्हें बरामदे में ही टेंट हाऊस के बिस्तर दिए गए। हम लोगों ने प्रागंण में अग्रि जलाकर अपनी रात व्यतीत की।
इतना दिया लक्ष्य
नसरुल्लागंज स्वास्थ्य केन्द्र को 1950 नसबंदी ऑपरेशन आगामी 31 मार्च 2011 तक करना है। इसके पूर्व 272 ऑपेरशन किये जा चुके हैं। आज मैगा शिविर में 146 महिलाओं का पंजीयन किया गया, जिसमें 143 महिलाओं को नसबंदी ऑपेरशन भोपाल से आये डॉक्टर एस.सी.भार्गव द्वारा किया गया।
इनका कहना है
ऑपरेशन में आने वाली महिलाओं के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा सभी प्रकार व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती है। बिस्तरों की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। अगर किसी को कोई शिकायत थी तो उसे बताना चाहिए। समस्या का निराकरण कर दिया जाता।
डॉ. आरसी. विश्वकर्मा
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