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शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

70 साल की हो गई सीहोर की कचौड़ी




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    10 पैसे से 5 रूपये तक पहुंची, स्वाद वही

    अमित कुईया
    सीहोर। प्रदेशभर में प्रसिद्ध सीहोर की कचौड़ी 70 साल की हो गई है, और अब इसकी कीमत 5 रूपये जा पहुंची है, लेकिन न तो उसके स्वाद में कमी आई है और न ही खाने वालों की। आज भी यह कचौड़ी प्रतिदिन प्रदेष से बाहर पहुंचती है और लोग इसके स्वाद का आनंद उठाते हैं।
    दरसल 70 साल पहले गंज में रहने वाले फूलचंद यादव और चुन्नीलाल कौषल जो मास्टरजी के नाम से प्रसिद्ध थे, इन दोनों की दोस्ती ने सीहोर की स्वादिष्ट कचौड़ी को जन्म दिया।
    इन दोनों दोस्तों ने 70 साल पहले सर्राफा बाजार के कोने में स्थित एक छोटी सी दुकान से अपने कारोबार की शुरूआत की।
    इसी दुकान में 70 साल पहले पहली बार हींगयुक्त वह स्वादिष्ट कचौड़ी बनी, जिसका स्वाद आज भी लोगों की जुबान से जाता नहीं है। उस समय इसकी कीमत मात्र 10 पैसे थी और यह 10 पैसे की कचौड़ी मात्र एक-दो साल में इतनी प्रसिद्ध हो गई, घर पर आने वाले मेहमानों को यदि चुन्नीलाल मास्टर साहब की दुकान की कचौड़ी नहीं खिलाई जाये तो मेहमाननवाजी अधूरी समझी जाती थी। समय गुजरा, कचौड़ी की कीमत भी बढ़ी। 20 पैसे से 50 पैसे तक कचौड़ी की कीमत जा पहुंची। यह वह समय था, जब इस दुकान पर कचौड़ी खाने वालों की भीड़ दुकान में समाती नहीं थी। 50 पैसे के बाद 1 रूपये, 2 रूपये और फिर अब 5 रूपये तक कचौड़ी की कीमत हो गई है। इस दौरान 2 दोस्तों द्वारा शुरू की गई दुकान के भी दो भाग हो गये, और अब यह दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कचौड़ी आज भी उतने ही स्वाद से खाई जाती है।
    रामभरोस की कचौड़ी
    70 के दषक के लगभग मण्डी में रामभरोस शर्मा के पिता नारायण शर्मा द्वारा बनाई गई कचौड़ी ने धूम मनाई, और मण्डी में रहने वाले हर आम और खास की दिनचर्या में इस कचौड़ी ने महत्वपूर्ण स्थान बना लिया। अनेक लोगों के दिन की शुरूआत इस कचौड़ी से ही होती थी। उस समय दुर्गा मंदिर के पास यह दुकान हुआ करती थी, लेकिन अब रामभरोस की यह कचौड़ी कृषि उपज मण्डी के पास एक ठेले पर लोग उतनी ही सिद्दत से खाते हैं।
    जहां लगती है हर रोज लाईन
    वर्तमान समय में एक क्लिक पर जमानेभर की वस्तुयें उपलब्ध हैं और यदि जेब में पैसे हों तो घर बैठे जीवन उपयोगी चीजें मिल जाती हैं, लेकिन इसके ठीक विपरीत बड़े बाजार में सड़क किनारे खड़े होने वाले दीपक के ठेले पर कचौड़ी का स्वाद लेने के लिए लबी लाईन लगती है और लोग घंटों इंतजार करते हैं। दीपक के ठेले पर लोग न केवल कचौड़ी खाने आते हैं बल्कि स्वादिष्ट मंगोड़ों के स्वाद का भी आनंद लेते हैं।
    राजधानी में भी सीहोर की कचौड़ी
    सीहोर की कचौड़ी ने स्वादपंसद लोगों को इतना आकृर्षित किया कि राजधानी भोपाल में भी जवाहर चौक पर सीहोर की कचौड़ी के नाम से एक व्यवसायी ने दुकान खोली और उसकी दुकान भी चल पड़ी।

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