sehore

Make animated glitter text scraps www.pigimail.com

गुरुवार, 30 जून 2011

डॉक्टर नहीं मरीज भी गायब हो जाते है सहाब....

खरी -खरी --अमित कुईया
सीहोर-बिना हंगामे और शोर शराबे के नवागत कलेक्टर डॉ.संजय गोयल ने सोमवार को जिला चिक्स्तालय का हाल जाना ..यह सही मायने में अव्यवस्था   देखने का ठीक तरीका था ..उनके इस निरिक्षण में यह साफ हो गया की जिला अस्पताल में  डॉक्टर उपस्तिथि पंजीयन में तो मौजूद रहते है लेकिन वास्तविक तौर पर ड्यूटी  के समय इनकी कुर्सिया खाली रहती है!निरिक्षण के दौरान साहब ने बच्चा वार्ड और अन्य वार्डो  का भी  निरिक्षण किया ,यहाँ भी मनो जैसे  अव्यवस्था उनका इंतजार कर रही थी ...हलाकि डाक्टारो के नदारद रहने का कारन जानने के लिए सिविल सर्जन को स्पस्तीकरण  देने को कहा है ...लेकिन इन सब कारणों के पीछे का सच जानने के लिए  अभी और ऐसे निरिक्षण करना  होंगे..तब कही जाकर सही मायने में बीमार अस्पताल का मर्ज आप पकड पाएंगे ...इस बीमार अस्पताल में कलेक्टर साहब ने गायब डाक्टर तो देख लिए ..लेकिन शयद साहब हैरान हो जाते जब वेह अस्पताल में भर्ती मरीजो की भी जानकारी ले लेते ..क्योकि इस अस्पताल में सुबह  भर्ती मरीज रात को पलंग पर नहीं वल्कि घर पर मिलता है ..जिसकी जानकारी स्वयं जिमेदारो को भी नहीं रहती ...
  नवागत कलेक्टर डॉ .संजय गोयल ने अपने निरिक्षण के दौरान अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था की केवल बानगी देखि है ..अस्पताल जो अक्सर कुछ एक डाक्टर की आपसी मनमुटावके कारन राजनीती का अखाडा बना रहता है ..यह हालत ही अस्पताल की बड़ी अव्यवस्था की वजह है ..जिसे समय रहते यदि सुधर दिया जाय तो अस्पताल की दुर्दशा वैसे ही सुधर जाये ..कलेक्टर कब निरिक्षण पर आ रहे है ..इसकी सुचना इन राजनेतिक डाक्टारो को पहले ही लग जाती है ..सोमवार को हुए निरिक्षण को भले ही आकस्मिक बतया गया हो ..लेकिन कलेक्ट्रेट के अन्दर्खानो की खबर रखने वाले उन डाक्टारो को  इस निरिक्षण की जानकारी पहले ही लग गयी थी और अस्पताल की राजनीती में खिलाडी समझे जाने वाले एक  डाक्टर के गुट विशेस से जुड़े सभी डाक्टर यहाँ कुछ देर पहले ही आये थे ...और गुट से अलग इन डाक्टारो को इसकी सुचना से दूर ही रखा गया ..वजह साफ थी की राजनीती के एक खिलाडी डाक्टर पुराने कलक्टरो की तरह नवागत कलेक्टर डॉ.गोयल को भी गुमराह करना चहते है..लेकिन सही मायने में अस्पताल के इस दुर्दशा की बड़ी वजह यहाँ उपस्थित इनमे से  ही कुछ एक डाक्टर थे ..
  अस्पताल में राजनेतिक संरक्षण की बात कही जाये या कुछ और लेकिन अस्पताल में पदस्थ कुछ एक डाक्टर के शहर में स्वयं के पैथोलोजी  लैब संचालित  है   यहाँ यह कथित डाक्टर मरीजो की जाँच करने  में ज्यादा रूचि
  दिखाते है ..जबकि अस्पताल में पदस्थ यह कथित डाक्टर लैब में ही पदस्थ है ..लेकिन इन्होने कितने मरीजो की जाँच यहाँ की है ..इसका पता कागजो को देखने के बाद खुद सामने आ जायेगा ...!
   खैर अस्पताल में व्यापत भर्राशाई को लेकर जितना लिखा जाये कम है..लेकिन यहाँ कहना ठीक  होगा की कलेक्टर साहब  आपके एक निरिक्षण से अस्पताल की अव्यवस्था कम नहीं होने वाली ..यदि वाकई आप अस्पताल की व्यवस्था सुधारना चाहते  है तो  बेवस पलंगो पर पड़े उन मरीजो से मिलना होगा  जो आये दिन अस्पताल की अव्यवस्था का शिकार हो रहे है ..लेकिन इस दिशा में  प्रशासनिक  ठोस पहेल न होने के कारन अपनी पीड़ा को नहीं बता पा रहे .. तब कही जाकर डायलिसिस पर पड़े इस बीमार अस्पताल का लाइलाज बन चूका मर्ज़ ठीक हो पायेगा ... नहीं तो जो पहले के निरिक्षनो के बाद चलता आ रहा है ..अभी भी वैसा ही चलेगा ...नमस्ते ...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें